समस्तीपुर | 26 फरवरी, 2026 विभूतिपुर प्रखंड में बाल विवाह मुक्ति रथ के संदेश और जिला प्रशासन की मुस्तैदी ने एक बार फिर मानवता की जीत सुनिश्चित की है। चाइल्ड हेल्पलाइन और जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के साझा प्रयासों से एक नाबालिग किशोरी को ‘बालिका वधू’ बनने से बचा लिया गया।

त्वरित कार्रवाई से रुका विवाह
जानकारी के अनुसार, चाइल्ड हेल्पलाइन समस्तीपुर को सूचना मिली थी कि विभूतिपुर प्रखंड के आलमपुर कोदरिया पंचायत (वार्ड 14, आलमपुर मुसहरी) में श्वेता कुमारी, पिता: गौरव दास (दोनों काल्पनिक नाम ) का बाल विवाह होने वाला है। सूचना मिलते ही प्रखंड विकास पदाधिकारी (BDO) सह सहायक बाल विवाह निषेध पदाधिकारी, विभूतिपुर, सुनील कुमार के नेतृत्व में एक टीम का गठन किया गया।
मौके पर दी गई कानूनी चेतावनी
प्रशासनिक अधिकारियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पीड़िता के घर पहुँचकर गृह भ्रमण किया। मौके पर उपस्थित मुखिया, वार्ड सदस्य और पंचायत सचिव के साथ एक सामूहिक बैठक की गई, जिसमें परिजनों को बाल विवाह निषेध अधिनियम की कठोर कानूनी धाराओं के बारे में विस्तार से बताया गया। काफी समझाने-बुझाने के बाद बालिका के माता-पिता ने अपनी गलती स्वीकार की और भविष्य में बाल विवाह न करने का लिखित वचन पत्र सौंपा।
इनकी रही मुख्य भूमिका
इस सफल रेस्क्यू ऑपरेशन में मुख्य रूप से निम्नलिखित सदस्यों का योगदान रहा:
- प्रशासनिक नेतृत्व: सुनील कुमार (BDO, विभूतिपुर)
- जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र: रवि कुमार एवं दीप्ति कुमारी (परियोजना समन्वयक)
- चाइल्ड हेल्पलाइन: मुन्ना कुमार (पर्यवेक्षक)
- प्रयास संस्था: कमलेश कुमार (सामाजिक कार्यकर्ता)
जागरूकता का प्रसार
घटना के बाद गांव में बाल विवाह के विरुद्ध जागरूकता अभियान चलाया गया। जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र के ‘एक्सेस टू जस्टिस’ कार्यक्रम के तहत ग्रामीणों को संकल्प दिलाया गया कि वे अपने क्षेत्र में किसी भी बच्चे का भविष्य अंधकार में नहीं झोंकने देंगे।
अधिकारी का संदेश: “बाल विवाह एक सामाजिक अभिशाप और कानूनी अपराध है। हम सजग हैं और किसी भी सूरत में प्रखंड में नाबालिगों का विवाह नहीं होने देंगे।” — प्रखंड विकास पदाधिकारी, विभूतिपुर



