पटना/सुपौल । बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज यानी मंगलवार, 10 मार्च 2026 से अपनी बहुचर्चित ‘समृद्धि यात्रा‘ के तीसरे और निर्णायक चरण का शुभारंभ कर रहे हैं। बजट सत्र के कारण स्थगित हुई यह यात्रा अब कोसी और सीमांचल के क्षेत्रों से दोबारा शुरू हो रही है। यात्रा के पहले दिन मुख्यमंत्री सुपौल और मधेपुरा जिलों का दौरा करेंगे, जहाँ वे न केवल सरकारी फाइलों की समीक्षा करेंगे बल्कि सीधे जनता के बीच जाकर सरकारी योजनाओं का ‘फीडबैक’ भी लेंगे।

आज की कार्ययोजना: स्पॉट विजिट और समीक्षा बैठक
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री आज सुबह सुपौल पहुंचेंगे। यहाँ वे विभिन्न विकास योजनाओं का ‘स्पॉट विजिट‘ करेंगे, जिसमें सड़क, पुल, स्वास्थ्य केंद्र और हर घर नल का जल जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं। दोपहर बाद वे मधेपुरा के लिए रवाना होंगे। मधेपुरा में मुख्यमंत्री जिले के आला अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। बताया जा रहा है कि आज का रात्रि विश्राम मधेपुरा में ही होगा, जिससे वे स्थानीय समस्याओं को और अधिक गहराई से समझ सकें।
- दौरा: 10 मार्च से 14 मार्च तक कुल 10 जिलों का भ्रमण।
- आज का कार्यक्रम: सुपौल और मधेपुरा में योजनाओं की समीक्षा और जनसंवाद।
- मकसद: जमीनी हकीकत का आकलन और लंबित परियोजनाओं को गति देना।
10 जिलों का ‘तूफानी‘ दौरा (शेड्यूल)
अगले पांच दिनों में मुख्यमंत्री बिहार के 10 जिलों की खाक छानेंगे। प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक कार्यक्रम इस प्रकार है:
- 10 मार्च: सुपौल एवं मधेपुरा
- 11 मार्च: अररिया एवं किशनगंज
- 12 मार्च: पूर्णिया एवं कटिहार
- 13 मार्च: सहरसा एवं खगड़िया
- 14 मार्च: बेगूसराय एवं शेखपुरा (समापन)
यात्रा के मुख्य उद्देश्य: घोषणा नहीं, अब हिसाब की बारी
इस यात्रा को लेकर सियासी गलियारों में काफी चर्चा है। यात्रा का मुख्य उद्देश्य केवल नई घोषणाएं करना नहीं, बल्कि पूर्व में घोषित योजनाओं की प्रगति का हिसाब लेना है।
- जनसंवाद: मुख्यमंत्री ग्राम पंचायतों में जाकर सीधे लाभार्थियों से बात करेंगे कि क्या उन्हें राशन, पेंशन और अन्य सहायता समय पर मिल रही है।
- परियोजनाओं की समीक्षा: ₹50,000 करोड़ से अधिक की लागत वाली विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति की जांच करना।
- अधिकारियों को निर्देश: लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर मौके पर ही कार्रवाई या सख्त निर्देश दिए जा सकते हैं।
संसदीय राजनीति के बाद अब ‘जनता की अदालत’ में नीतीश
राजधानी पटना में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया और राजनीतिक जोड़-घटाव को सुव्यवस्थित करने के तुरंत बाद, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार अब ‘जनता की अदालत’ में उतर चुके हैं। सियासी गलियारों में चर्चा है कि जहाँ एक ओर उन्होंने उच्च सदन के लिए अपनी रणनीतिक बिसात बिछा दी है, वहीं दूसरी ओर ‘समृद्धि यात्रा’ के जरिए वे सीधे आम जनमानस की नब्ज टटोलने निकल पड़े हैं। नामांकन की गहमागहमी से निकलकर सीधे सुपौल और मधेपुरा की धरती पर जनता से संवाद करना यह दर्शाता है कि नीतीश कुमार संसदीय समीकरणों के साथ-साथ जमीनी फीडबैक को भी समान प्राथमिकता दे रहे हैं। आने वाले विधानसभा चुनावों और राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा के बीच, राज्यसभा नामांकन के ठीक बाद शुरू हुई यह यात्रा राज्य की राजनीति में एक बड़े ‘मास्टरस्ट्रोक’ के रूप में देखी जा रही है।
सियासी मायने और ‘समृद्धि‘ का संकल्प
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2026 की यह ‘समृद्धि यात्रा’ नीतीश कुमार के सुशासन के मॉडल को और अधिक धार देने की कोशिश है। यात्रा के माध्यम से वे यह संदेश देना चाहते हैं कि सरकार सचिवालय से नहीं, बल्कि जनता के बीच से चल रही है। 16 जनवरी को बेतिया से शुरू हुई इस यात्रा के अब तक के दो चरणों ने राज्य में विकास की एक नई बहस छेड़ दी है।
पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि यह यात्रा बिहार को ‘विकसित बिहार‘ बनाने के संकल्प की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगी।
| तिथि | पूर्वाह्न (सुबह) | अपराह्न (दोपहर) |
| 10.03.2026 | सुपौल | मधेपुरा |
| 11.03.2026 | अररिया | किशनगंज |
| 12.03.2026 | पूर्णिया | कटिहार |
| 13.03.2026 | सहरसा | खगड़िया |
| 14.03.2026 | बेगूसराय | शेखपुरा |




