“दमन और दलाल-माफियाओं के खिलाफ उलगुलान, ताजपुर में माले का महा-मंथन शुरू”

ताजपुर (समस्तीपुर) | 25 मार्च 2026 | ताजपुर बाजार स्थित फलमंडी परिसर बुधवार को लाल झंडों से पट गया। अवसर था भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) लिबरेशन के प्रखंड सम्मेलन का। कार्यक्रम का विधिवत आगाज़ वरिष्ठ शिक्षाविद डॉ० प्रभात कुमार द्वारा झंडोत्तोलन और शहीदों को दी गई भावभीनी मौन श्रद्धांजलि के साथ हुआ। इस दौरान ‘शहीदों के अरमानों को मंजिल तक पहुँचाएंगे’ और ‘साम्राज्यवाद-फासीवाद मुर्दाबाद’ के नारों से पूरा परिसर गूँज उठा।

नीतीश और भाजपा पर बरसे डॉ० प्रभात कुमार

सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए डॉ० प्रभात कुमार ने वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य पर बेहद कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि भाजपा एक ऐसी ‘दंगाई पार्टी’ है जो हिंदू-मुस्लिम एकता को खंडित करना चाहती है। उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को आड़े हाथों लेते हुए कहा:

आज अगर बिहार में भाजपा इतनी सशक्त स्थिति में है, तो इसका सबसे बड़ा जिम्मेदार नीतीश कुमार की कुर्सी की चाहत है। उन्होंने अपने स्वार्थ के लिए एक ऐसी जन-विरोधी और पूंजीपतियों की पार्टी को आगे बढ़ाया जो गरीबों की एकता को तोड़ना चाहती है। भाजपा फासीवादी है, जो न जमीन की बराबरी चाहती है, न शिक्षा और स्वास्थ्य की।”

अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्रों और प्रधानमंत्री की चुप्पी पर सवाल

डॉ० कुमार ने वैश्विक राजनीति का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि अमेरिका (ट्रंप प्रशासन) दुनिया की सबसे बड़ी साम्राज्यवादी ताकत है, जो देशों के राष्ट्रपतियों को किडनैप कर रही है और युद्ध थोप रही है। उन्होंने इजराइल और ईरान के संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि लेबनान और ईरान में मासूम बच्चे मारे जा रहे हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री ने निंदा का एक शब्द तक नहीं कहा। यह आक्रांताओं का मूक समर्थन है।

ताजपुर की माटी और माले का संघर्ष

डॉ० प्रभात कुमार ने याद दिलाया कि जननायक कर्पूरी ठाकुर की इस कर्मभूमि को भाकपा माले ने अपने खून-पसीने से सींचा है। उन्होंने कहा कि यहाँ के कार्यकर्ताओं ने सामंती दमन और पुलिसिया यातनाएं झेलकर एक क्रांतिकारी आंदोलन खड़ा किया है। इसी संघर्ष का परिणाम है कि आज यहाँ दलाल-माफियाओं और भ्रष्ट अधिकारियों पर करारा प्रहार संभव हो सका है।

संगठनात्मक चर्चा और भावी रणनीति

सम्मेलन के खुले सत्र की अध्यक्षता प्रभात रंजन गुप्ता, ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह एवं आसिफ होदा के तीन सदस्यीय अध्यक्ष मंडल ने की, जबकि संचालन सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने किया। विदाई प्रखंड कमिटी द्वारा दस्तावेजों के वितरण के बाद सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने 6 पृष्ठों की कामकाज रिपोर्ट पेश की।

सम्मेलन के मुख्य बिंदु:

  • प्रतिनिधि बहस: करीब 20 प्रतिनिधियों ने संगठन को मजबूत करने और आगामी आंदोलनों की रणनीति पर सुझाव दिए।
  • प्रमुख मुद्दे: वक्ताओं ने बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, बदहाल शिक्षा-स्वास्थ्य व्यवस्था और किसानों-मजदूरों के शोषण को मुख्य मुद्दा बनाया।
  • अतिथि वक्ता: जिला कमिटी सदस्य महेश कुमार, जयंत कुमार, उपेंद्र राय सहित राज्य कमिटी सदस्य बंदना सिंह और डॉ० दिलीप कुमार ने भी अपने विचार रखे।

निर्णायक संघर्ष का आह्वान

वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि भाकपा माले, सीपीआई और सीपीएम जैसी अन्य वामपंथी पार्टियों से अपने जुझारू तेवर और स्पष्ट सिद्धांतों के कारण अलग है। राजद के साथ चुनावी तालमेल की जरूरत को स्वीकारते हुए भी उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल भाजपा को हराने की वैचारिक क्षमता माले के पास है। देर शाम तक चले इस सम्मेलन में संगठन को और अधिक धारदार बनाने और जन-आंदोलनों को तेज करने का संकल्प लिया गया।

क्या बोले डॉ० प्रभात कुमार?
“भाजपा एक दंगाई पार्टी है, जो हिंदू-मुस्लिम एकता को कभी नहीं देखना चाहती। आज बिहार में अगर भाजपा इतनी मजबूत है, तो उसका सहारा केवल कुर्सी की चाहत रखने वाले नीतीश कुमार बने हैं।”
“आजादी का मतलब सिर्फ अंग्रेजों को खदेड़ना नहीं था, बल्कि गरीबी और शोषण को दूर कर सबको बराबरी पर लाना था। लेकिन 75 साल बाद भी समाज में न संसाधनों की बराबरी है, न शिक्षा की और न ही जमीन की।”
“ईरान और लेबनान में मासूम बच्चे मर रहे हैं, लेकिन भारत के प्रधानमंत्री ने निंदा का एक शब्द तक नहीं बोला। ट्रंप जैसे साम्राज्यवादी ताकतों का समर्थन करना भारत की गरिमा के खिलाफ है।”
“भाकपा माले का अपना एक तेवर रहा है। हमने सामंती दमन और प्रशासनिक यातनाएं झेलकर विकास की रफ्तार को तेज किया है। दलाल-माफियाओं और भ्रष्ट जन-प्रतिनिधियों के खिलाफ हमारा संघर्ष निर्णायक रहेगा।”

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