समस्तीपुर | 9 अप्रैल, 2026 नए शैक्षणिक सत्र के शुरू होते ही समस्तीपुर के निजी स्कूलों द्वारा अभिभावकों की जेब पर डाले जा रहे अतिरिक्त बोझ और मनमानी के खिलाफ नागरिक समाज ने निर्णायक लड़ाई का ऐलान कर दिया है। किताबों, ड्रेस और अन्य शिक्षण सामग्रियों में भारी कमीशनखोरी का आरोप लगाते हुए संगठन ने आगामी 15 अप्रैल को जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया है।

बीते पांच अप्रैल को समस्‍तीपुर में नागरिक समाज  के द्वारा किए गये प्रदर्शन की फाइल फोटो

NCERT को दरकिनार कर कमीशन का खेल

नागरिक समाज के सह-संयोजक सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने जिलाधिकारी, अनुमंडलाधिकारी और जिला शिक्षा पदाधिकारी को पत्र भेजकर इस पूरे सिंडिकेट का पर्दाफाश करने की मांग की है। आवेदन में कहा गया है कि स्कूल संचालक जानबूझकर सस्ती NCERT किताबों के बजाय निजी पब्लिशर्स की महंगी किताबें चला रहे हैं। इन किताबों, ड्रेस, टाई, बेल्ट और डायरी पर प्रिंट रेट वास्तविक लागत से कई गुना अधिक अंकित कराया जाता है, जिसका सीधा मुनाफा स्कूल संचालकों को कमीशन के रूप में मिलता है।

अभिभावकों पर बनाया जा रहा है दबाव

आरोप है कि स्कूलों ने सेटिंग के तहत कुछ विशेष अस्थाई दुकानें तय कर रखी हैं, जहाँ से सामग्री खरीदने के लिए अभिभावकों पर दबाव बनाया जाता है। सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने इसे नई शिक्षा नीति की मूल भावना के खिलाफ बताते हुए कहा कि यह शिक्षा का व्यवसायीकरण है।

अव्यवस्थाओं के बीच ‘अवैध’ वसूली

नागरिक समाज ने स्कूलों की आंतरिक अव्यवस्थाओं पर भी प्रहार किया है:

  • नियमों की धज्जियां: शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत 25% गरीब बच्चों के नामांकन की अनदेखी की जा रही है।
  • सुविधाओं का टोटा: कई स्कूलों में लैब, लाइब्रेरी, शुद्ध पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाएं तक नहीं हैं।
  • अकुशल स्टाफ: कम वेतन के लालच में अप्रशिक्षित शिक्षकों से शिक्षण कार्य कराया जा रहा है।
  • फीस का बोझ: री-एडमिशन, डेवलपमेंट चार्ज और सालाना शुल्क के नाम पर मनमानी वसूली जारी है।

आंदोलन की रूपरेखा

नागरिक समाज ने चेतावनी दी है कि यदि इन छात्र-विरोधी गतिविधियों पर तुरंत रोक नहीं लगाई गई, तो प्रदर्शन को और उग्र किया जाएगा।

  • कार्यक्रम: विशाल जुलूस एवं प्रदर्शन
  • तिथि: 15 अप्रैल 2026 (बुधवार)
  • समय: शाम 5:00 बजे
  • स्थान: स्टेडियम गोलंबर से समाहरणालय (कलेक्ट्रेट) तक

“अभिभावकों का शोषण अब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन को जवाब देना होगा कि नियमों को ताक पर रखकर स्कूलों को लूट की छूट कैसे मिली हुई है।” — सुरेंद्र प्रसाद सिंह, सह-संयोजक, नागरिक समाज


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