नाम का ‘नगर’, व्यवस्था ‘लाचार’: सकरा नगर पंचायत में शहरी सुविधाओं पर ग्रहण

सकरा (मुजफ्फरपुर): सरकार ने सकरा को नगर पंचायत का दर्जा तो दे दिया, लेकिन यहाँ की सुविधाओं को ‘शहरी’ चश्मा पहनाना भूल गई। स्थिति यह है कि सकरा की जनता कागजों पर तो शहरवासी बन गई है और शहरी दरों पर टैक्स का बोझ भी ढो रही है, लेकिन सुविधाओं के नाम पर आज भी उनके साथ ग्रामीणों जैसा व्यवहार किया जा रहा है। इसका सबसे बड़ा प्रमाण है रसोई गैस की रिफिलिंग में होने वाली धांधली।


’25 दिनके हक पर ’45 दिनकी मार

नियमों के मुताबिक, शहरी क्षेत्र (नगर पंचायत) में गैस सिलेंडर की बुकिंग अवधि 25 दिन होनी चाहिए। लेकिन सकरा नगर पंचायत के निवासियों को 45 दिन का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। सवाल यह है कि जब जनता से टैक्स शहरी लिया जा रहा है, तो उन्हें 45 दिनों वाले ग्रामीण सिस्टम में क्यों झोंका गया है?

एजेंसी का तर्क: “हवा में है नगर पंचायत का दर्जा”

जब ‘सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी’ के प्रोपराइटर संतोष राम से इस देरी पर सवाल किया गया, तो उनके जवाब ने व्यवस्था की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने स्पष्ट कहा:

हमे IOCL (इंडियन ऑयल) से अब तक कोई लिखित आदेश नहीं मिला है कि सकरा को शहरी क्षेत्र मानकर 25 दिन की समय सीमा लागू की जाए। जब तक प्रशासन या विभाग पत्र नहीं देता, हम इसे ग्रामीण क्षेत्र ही मानेंगे। अभी तो हालात इतने असामान्य हैं कि हम होम डिलीवरी तक नहीं दे पा रहे।”

एजेंसी के इस बयान ने साफ कर दिया है कि सरकारी विभागों के बीच तालमेल की कमी का खामियाजा आम जनता भुगत रही है।

तस्‍वीर में जानकारी देते ‘सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी’ के प्रोपराइटर संतोष राम

चिराग तले अंधेरा: नगर के बीचों-बीच रहकर भी नियमों से बेखबर

हैरानी की बात तो यह है कि सिकंदर इंडेन गैस एजेंसी का मुख्य कार्यालय कहीं दूर नहीं, बल्कि स्वयं सकरा नगर पंचायत क्षेत्र की सीमाओं के भीतर ही स्थित है। एजेंसी के संचालक और कर्मचारी प्रतिदिन इसी नगर की सड़कों से गुजरते हैं, यहीं के संसाधनों का उपयोग करते हैं, लेकिन जब बात यहाँ के उपभोक्ताओं को शहरी सुविधा देने की आती है, तो ‘अभिलेखों और सूचनाओं के अभाव’ का बहाना थमा दिया जाता है। यह जानते हुए भी कि एजेंसी शहरी क्षेत्र में अवस्थित है, उपभोक्ताओं को ग्रामीण क्षेत्र के कोटे (45 दिन) में धकेलना न केवल प्रशासनिक अनदेखी है, बल्कि नगर पंचायत की अस्मिता के साथ एक भद्दा मजाक भी है। आखिर अपनी आंखों के सामने हो रहे इस बदलाव को एजेंसी प्रबंधन और विभाग क्यों अनदेखा कर रहा है?

सिस्टम पर चोट: टैक्स वसूली में तेजी, सुविधा देने में पैरालाइसिस

यह सिर्फ गैस की समस्या नहीं, बल्कि एक प्रशासनिक विफलता है।

  • सवाल 1: क्या IOCL और जिला प्रशासन को यह नहीं पता कि सकरा अब नगर पंचायत है?
  • सवाल 2: क्या अधिकारियों को केवल टैक्स वसूलने के लिए नगर पंचायत की याद आती है?
  • सवाल 3: आम जनता इस विभागीय सुस्ती की सजा आखिर कब तक भुगतेगी?

उपाध्यक्ष ने दिया आश्वासन, अब कार्रवाई का इंतजार

इस गंभीर मुद्दे पर नगर पंचायत सकरा के उपाध्यक्ष रणवीर कुमार सिंह ने कड़ा संज्ञान लिया है। उन्होंने ‘न्यूज़ भारत टीवी’ के स्‍थानीय संवाददाता से बातचीत में कहा कि वह कार्यपालक पदाधिकारी को इस स्थिति से अवगत कराकर कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही गैस एजेंसी और IOCL के वरीय अधिकारियों को पत्र जारी किया जाएगा ताकि नगर पंचााायत सकरा की तजनता को 25 दिन में गैस मिल सके।  

वैसे सकरा की जनता अब आश्वासनों से ऊब चुकी है। यदि नगर पंचायत का दर्जा केवल कागजों और टैक्स वसूली तक सीमित रहा, तो आने वाले दिनों में प्रशासन को जनता के उग्र आंदोलन का सामना करना पड़ सकता है।

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