मुजफ्फरपुर / पटना (बिहार): किसी भी शहर की सूरत बदलने और उसे आधुनिक सुविधाओं से लैस करने के लिए ‘अर्थ’ यानी धन की आवश्यकता होती है। बिहार के नगर निकाय क्षेत्रों में रहने वाले आम नागरिक, व्यवसायी और संस्थान जो टैक्स सरकार को देते हैं, वह केवल एक कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि शहर के विकास का ‘रक्त’ (लाइफ ब्लड) है। अक्सर करदाताओं के मन में यह सवाल उठता है कि नगर पंचायत उनसे किन-किन मदों में वसूली करती है और आखिर यह पैसा जाता कहाँ है?

वास्तव में, नगर पंचायत मुख्य रूप से होल्डिंग टैक्स (संपत्ति कर), व्यावसायिक ट्रेड लाइसेंस शुल्क, जल कर, सफाई/कचरा संग्रहण शुल्क (यूजर चार्जेज) और विज्ञापन कर जैसे विभिन्न माध्यमों से राजस्व जुटाती है।
कर क्यों वसूला जाता है? : कर वसूलने का मुख्य उद्देश्य ‘सामूहिक सुविधा’ है। आपके द्वारा दिया गया एक छोटा सा अंश ही रात में सड़कों पर जलने वाली स्ट्रीट लाइट, सुबह आपके दरवाजे से कचरा उठाने वाली गाड़ी, साफ नालियों और पार्कों के रखरखाव का खर्च उठाता है।
कर वसूलने के मायने : टैक्स वसूलने का असली मायना ‘स्वराज और सहभागिता‘ है। जब एक नागरिक टैक्स देता है, तो वह नगर पंचायत की कार्यप्रणाली में हिस्सेदार बनता है और उसे सुविधाओं पर सवाल उठाने का नैतिक अधिकार मिलता है। यह राजस्व ही नगर पंचायत को आत्मनिर्भर बनाता है ताकि उसे हर छोटी जरूरत के लिए राज्य या केंद्र सरकार के अनुदान का इंतजार न करना पड़े। सरल शब्दों में कहें तो, टैक्स का भुगतान आपके शहर के बेहतर भविष्य की एक ‘इन्वेस्टमेंट’ है।
बिहार में नगर पंचायतों के पास अपने क्षेत्र के विकास और नागरिक सुविधाओं (जैसे सफाई, स्ट्रीट लाइट, जल निकासी) के प्रबंधन के लिए विभिन्न स्रोतों से राजस्व (Revenue) जुटाने का अधिकार होता है। ‘बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007’ के अनुसार, नगर पंचायतें मुख्य रूप से निम्नलिखित मदों में कर और शुल्क वसूलती हैं:
नगर पंचायत द्वारा वसूले जाने वाले प्रमुख कर
1. संपत्ति कर (Property Tax / Holding Tax)
यह नगर पंचायत की आय का सबसे मुख्य स्रोत है।
- आवासीय कर: निजी मकानों और आवासीय भवनों पर उनके क्षेत्रफल (Square Feet) और निर्माण के प्रकार (पक्का/कच्चा) के आधार पर वार्षिक कर लिया जाता है।
- व्यावसायिक कर: दुकानों, शोरूम, गोदामों, निजी अस्पतालों, होटलों और शैक्षणिक संस्थानों पर आवासीय दर की तुलना में अधिक दर से कर वसूला जाता है।
2. सेवा कर (Service Taxes)
संपत्ति कर के साथ-साथ कुछ सेवाओं के बदले अतिरिक्त शुल्क लिया जाता है :
- जल कर (Water Tax): जिन घरों या प्रतिष्ठानों में नगर पंचायत द्वारा पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति की जाती है।
- स्वच्छता कर (Sanitation/Scavenging Tax): नालियों की सफाई और कचरा प्रबंधन के लिए।
- प्रकाश कर (Lighting Tax): सार्वजनिक सड़कों पर स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था के लिए।
3. विज्ञापन कर (Advertisement Tax)
नगर पंचायत क्षेत्र के भीतर लगने वाले होर्डिंग्स, बैनर, पोस्टर्स और बिजली के खंभों पर लगे विज्ञापनों से टैक्स वसूला जाता है। व्यवसायी यदि अपनी दुकान के बाहर बड़ा बोर्ड लगाते हैं, तो उन्हें भी इसका शुल्क देना पड़ता है।
व्यावसायियों और अन्य स्रोतों से वसूले जाने वाले शुल्क
4. ट्रेड लाइसेंस शुल्क (Trade License Fee)
किसी भी प्रकार का व्यवसाय (जैसे किराना दुकान, होटल, वर्कशॉप, क्लीनिक आदि) शुरू करने के लिए नगर पंचायत से ट्रेड लाइसेंस लेना अनिवार्य है। इसके लिए वार्षिक नवीनीकरण शुल्क (Renewal Fee) देना होता है।
5. यूजर चार्ज (User Charges – कचरा उठाव शुल्क)
वर्तमान में ‘स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत घर-घर से कचरा उठाने के लिए नगर पंचायतें शुल्क लेती हैं।
- घरों से: ₹30 से ₹100 प्रतिमाह (लगभग)।
- दुकानों/व्यावसायिक संस्थानों से: कचरे की मात्रा के आधार पर अधिक शुल्क।
6. बाजार/हाट सैरात शुल्क
नगर पंचायत के स्वामित्व वाली जमीन पर लगने वाले साप्ताहिक हाट, बाजार या मेलों में दुकान लगाने वाले व्यापारियों से दैनिक या मासिक ‘तहबाजारी’ (सैरात ) वसूली जाती है।
7. वाहनों पर शुल्क
- पार्किंग शुल्क: नगर पंचायत द्वारा चिन्हित पार्किंग स्थलों पर वाहन खड़ा करने का शुल्क।
- पंजीकरण शुल्क: ई-रिक्शा, ठेला, और अन्य गैर-मोटर वाहनों के पंजीकरण पर शुल्क।
8. मनोरंजन कर (Entertainment Tax)
नगर पंचायत क्षेत्र में आयोजित होने वाले सर्कस, नुमाइश, सिनेमा हॉल या किसी बड़े मनोरंजन कार्यक्रम पर टैक्स लिया जाता है।
अन्य प्रशासनिक शुल्क
- नक्शा पास शुल्क: नए भवन निर्माण के लिए ब्लूप्रिंट/नक्शा पास कराने का शुल्क।
- किराया: नगर पंचायत की अपनी दुकानों (Municipal Shops) या कम्युनिटी हॉल (बारात घर) का किराया।
- प्रमाण पत्र शुल्क: जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, विवाह पंजीकरण या एनओसी (NOC) जारी करने के लिए लिया जाने वाला सरकारी शुल्क।
बिहार में नगर पंचायतों द्वारा वसूले जाने वाले होल्डिंग टैक्स (Property Tax) और ट्रेड लाइसेंस शुल्क की गणना के अपने निर्धारित मानक और तरीके हैं।
नगर पंचायत किसी भी राज्य (जैसे बिहार) में ‘नगर निकाय‘ की सबसे पहली और बुनियादी इकाई होती है। यह उन क्षेत्रों में बनाई जाती है जो ग्रामीण से शहरी क्षेत्र में परिवर्तित हो रहे होते हैं। भारतीय संविधान के 74वें संशोधन के अनुसार, नगर पंचायत के कार्य और अधिकार क्षेत्र बहुत विस्तृत हैं।
नगर पंचायत का कार्य क्षेत्र (फंक्शनल डोमेन)
नगर पंचायत का मुख्य उत्तरदायित्व शहर का अर्बन प्लानिंग और इकोनॉमिक डेवलपमेंट करना है। आखिर एक नगर पंचायत यह कार्य कैसे करता हैं:
1. अर्बन प्लानिंग एंड डेवलपमेंट
- टाउन प्लानिंग शहर के विस्तार और संरचना की योजना बनाना।
- रेगुलेशन ऑफ लैंड यूज़ : जमीन के उपयोग (आवासीय या व्यावसायिक) का निर्धारण करना।
- कंस्ट्रक्शन ऑफ बिल्डिंग्स : मकानों और दुकानों के नक्शे पास करना और अवैध निर्माण रोकना।
2. पब्लिक हेल्थ एंड सैनिटेशन
- सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट : घर-घर से कचरा इकट्ठा करना और उसका सही निपटान (डिस्पोजल) करना।
- ड्रेनेज एंड सीवरेज : गंदे पानी की निकासी के लिए नालियों और गटर की व्यवस्था करना।
- क्लीनलीनेस : सड़कों और सार्वजनिक स्थानों की सफाई सुनिश्चित करना।
3. पब्लिक एमिनिटीज (सार्वजनिक सुविधाएँ)
- स्ट्रीट लाइटिंग : सड़कों और गलियों में बिजली के खंभे और लाइट लगवाना।
- पब्लिक पार्क्स एंड प्लेग्राउंड्स : मनोरंजन के लिए पार्कों और खेल के मैदानों का निर्माण व रखरखाव।
- बर्निंग घाट्स एंड ब्यूरियल ग्राउंड्स : श्मशान घाट और कब्रिस्तानों का प्रबंधन।
4. वॉटर सप्लाई
- ड्रिंकिंग वॉटर : पाइपलाइन के जरिए शुद्ध पेयजल की आपूर्ति करना।
- पब्लिक हाइड्रेंट्स : सार्वजनिक प्याऊ और नलों की व्यवस्था।
5. सोशल एंड इकोनॉमिक जस्टिस
- स्लम इम्प्रूवमेंट : मलिन बस्तियों (झुग्गी-झोपड़ियों) में सड़क, पानी और बिजली पहुँचाना।
- अर्बन पॉवर्टी एलीविएशन: गरीबी उन्मूलन की योजनाएं (जैसे एन.यू.एल.एम.) लागू करना।
- वेलफेयर ऑफ वीकर सेक्शंस : दिव्यांगों, बुजुर्गों और पिछड़े वर्गों के लिए कल्याणकारी कार्य।
6. एडमिनिस्ट्रेटिव वर्क्स
- रजिस्ट्रेशन ऑफ बर्थ एंड डेथ : जन्म और मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करना।
- लेवी एंड कलेक्शन ऑफ टैक्सेज : होल्डिंग टैक्स, ट्रेड लाइसेंस और अन्य शुल्क वसूलना।
7. मिसलेनियस वर्क्स (अन्य कार्य)
- कैटल पॉन्ड्स : आवारा पशुओं के लिए कांजी हाउस का प्रबंधन।
- मार्केट्स एंड फेयर्स : बाजारों और मेलों का आयोजन व नियंत्रण।
- फायर सर्विसेज : आग बुझाने की सेवाओं में सहयोग (बड़े नगरों में)।
सरल शब्दों में कहें तो, ‘गेट से लेकर घाट तक‘ की जिम्मेदारी नगर पंचायत की होती है। आपके घर के बाहर की सड़क, नाली, लाइट और आपके जन्म से लेकर मृत्यु तक के सरकारी रिकॉर्ड का प्रबंधन नगर पंचायत के अधिकार क्षेत्र (जूरिस्डिक्शन) में आता है।

नगर पंचायत के आय के स्रोत (पैसा कहाँ से आता है):
इन कार्यों को करने के लिए नगर पंचायत के पास दो मुख्य स्रोत होते हैं:
- स्वयं का कर : होल्डिंग टैक्स, जल कर, ट्रेड लाइसेंस फीस और विज्ञापन कर।
- सरकारी अनुदान : राज्य वित्त आयोग और केंद्रीय वित्त आयोग से मिलने वाला पैसा।
संक्षेप में कहें तो, ‘नगर पंचायत का कार्य क्षेत्र अपने वार्डों के भीतर रहने वाले नागरिकों को एक सम्मानजनक और स्वच्छ शहरी जीवन प्रदान करना है।‘ इसमें सड़क, नाली, बिजली (स्ट्रीट लाइट), पानी और सफाई के साथ-साथ गरीबों के लिए सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाना सबसे प्रमुख है।
1. होल्डिंग टैक्स (संपत्ति कर) की गणना
बिहार में होल्डिंग टैक्स की गणना ARV (Annual Rental Value) यानी ‘वार्षिक किराया मूल्य’ के आधार पर की जाती है। इसकी गणना के लिए मुख्य रूप से तीन मापदंड देखे जाते हैं:
गणना का सूत्र:
वार्षिककर=(कुलनिर्मितक्षेत्र)×(यूनिटरेट)×(उपयोगगुणांक)
- कुल निर्मित क्षेत्र (Carpet Area): आपके घर या दुकान का ढका हुआ क्षेत्रफल (वर्ग फुट में)।
- यूनिट रेट (Unit Rate): यह सड़क के प्रकार पर निर्भर करता है:
- मुख्य सड़क (Principal Main Road): यहाँ दर सबसे अधिक होती है।
- मुख्य सड़क (Main Road): मध्यम दर।
- अन्य सड़कें (Other Roads): सबसे कम दर।
- उपयोग गुणांक (Usage Factor):
- आवासीय (Residential): कम टैक्स।
- व्यावसायिक (Commercial): आवासीय से लगभग 2 से 3 गुना अधिक टैक्स।
- सरकारी/संस्थान: अलग दरें।
- निर्माण का प्रकार: पक्का मकान (आरसीसी), बिना छत वाला पक्का मकान, या कच्चा मकान। पक्के मकान पर टैक्स अधिक होता है।
उदाहरण: यदि आपके पास मुख्य सड़क पर 1000 वर्ग फुट की व्यावसायिक दुकान है, तो उसका टैक्स उसी आकार के गली में स्थित आवासीय घर से काफी ज्यादा होगा।
2. ट्रेड लाइसेंस शुल्क (व्यावसायिक लाइसेंस)
व्यवसायियों को अपनी दुकान या प्रतिष्ठान चलाने के लिए नगर पंचायत से लाइसेंस लेना होता है। इसकी गणना के आधार निम्नलिखित हैं:
- व्यवसाय की प्रकृति : * श्रेणी A: बड़े शोरूम, होटल, सिनेमा हॉल, निजी अस्पताल, बैंक (अधिक शुल्क)।
- श्रेणी B: मध्यम दुकानें, कोचिंग संस्थान, वर्कशॉप।
- श्रेणी C: छोटी किराना दुकान, गुमटी, सैलून (न्यूनतम शुल्क)।
- स्थान (Location): पॉश इलाकों या मुख्य बाजारों में स्थित दुकानों के लिए शुल्क अधिक होता है।
- क्षेत्रफल (Space): दुकान या प्रतिष्ठान का कुल क्षेत्रफल कितना है, इसके आधार पर भी स्लैब तय होते हैं।
शुल्क का प्रकार:
- पंजीकरण शुल्क (Registration Fee): पहली बार लाइसेंस बनवाते समय।
- नवीनीकरण शुल्क (Renewal Fee): यह प्रतिवर्ष (आमतौर पर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में) जमा करना होता है।
3. अन्य शुल्क: कचरा शुल्क (User Charge)
यह अब अनिवार्य कर दिया गया है। इसकी गणना बहुत सरल है:
- आवासीय: ₹30 से ₹100 प्रति माह (नगर पंचायत के आकार और श्रेणी के आधार पर)।
- व्यावसायिक: ₹200 से ₹1000 या उससे अधिक (कचरे की मात्रा और व्यवसाय के प्रकार, जैसे रेस्टोरेंट या क्लिनिक के आधार पर)।
टैक्स जमा करने का तरीका (Online & Offline)
- ऑफलाइन: आप नगर पंचायत के कार्यालय में जाकर फॉर्म भरकर नकद या चेक से जमा कर सकते हैं।
- ऑनलाइन: बिहार सरकार के पोर्टल Nagarseva पर जाकर अपनी ‘Property ID’ या ‘Trade License No’ के जरिए घर बैठे भुगतान कर सकते हैं।
होल्डिंग टैक्स (संपत्ति कर) जमा करने की प्रक्रिया इस बात पर निर्भर करती है कि आप पहली बार टैक्स जमा कर रहे हैं (नया असेसमेंट) या पहले से जमा करते आ रहे हैं।
बिहार के नगर निकायों (नगर पंचायत, परिषद या निगम) में मुख्य रूप से निम्नलिखित दस्तावेजों की आवश्यकता होती है:
1. पुराने करदाताओं के लिए (Legacy/Existing Households)
यदि आपकी प्रॉपर्टी का होल्डिंग नंबर पहले से बना हुआ है, तो आपको केवल ये चाहिए:
- पुराना होल्डिंग नंबर (PID): पिछली किसी भी टैक्स रसीद पर लिखा होता है।
- पिछली टैक्स रसीद की फोटोकॉपी: पिछला भुगतान कब और कितना किया गया था, इसके प्रमाण के लिए।
- आधार कार्ड: पहचान और पते के सत्यापन के लिए।
2. नए करदाताओं के लिए (New Assessment)
यदि आप पहली बार अपनी संपत्ति का पंजीकरण (Self Assessment) करा रहे हैं, तो आपको SAS (Self Assessment Scheme) फॉर्म के साथ ये दस्तावेज देने होंगे:
- स्वामित्व के दस्तावेज (Property Documents): रजिस्ट्री का पेपर (Sale Deed), लीज डीड या बंटवारा नामा।
- पहचान पत्र (KYC): आधार कार्ड, पैन कार्ड या वोटर आईडी।
- बिजली का बिल: वर्तमान पते के प्रमाण और लोड की जानकारी के लिए।
- नक्शा या स्केच: निर्मित क्षेत्र (Built-up area) की जानकारी के लिए (यदि उपलब्ध हो)।
3. यदि मालिकाना हक बदलना हो (Mutation/Ownership Transfer)
अगर आपने पुरानी प्रॉपर्टी खरीदी है और अब अपने नाम पर टैक्स कटवाना चाहते हैं:
- रजिस्टर्ड सेल डीड (Sale Deed) की कॉपी।
- पिछले मालिक की टैक्स रसीद।
- एनओसी (NOC): यदि लागू हो।
- मृत्यु प्रमाण पत्र और वंशावली: (यदि संपत्ति विरासत/उत्तराधिकार में मिली हो)।

जमा करने के तरीके:
- ऑफलाइन: नगर पंचायत कार्यालय (जैसे सकरा कार्यालय) में जाकर। वहां काउंटर पर आप नकद, चेक या डिमांड ड्राफ्ट से भुगतान कर सकते हैं।
- ऑनलाइन: आप बिहार सरकार के आधिकारिक पोर्टल Nagarseva पर जाकर अपनी ‘Property ID’ डालकर सीधे यूपीआई (UPI), डेबिट कार्ड या नेट बैंकिंग से भुगतान कर सकते हैं।
- टैक्स कलेक्टर: कई बार नगर पंचायत द्वारा अधिकृत कर्मचारी (Tax Collector) घर-घर जाकर भी टैक्स वसूलते हैं, उन्हें भुगतान करने पर तुरंत रसीद जरूर लें।
बिहार में ऑनलाइन होल्डिंग टैक्स (संपत्ति कर) जमा करना अब काफी आसान हो गया है। आप घर बैठे नगर सेवा (Nagarseva) पोर्टल के माध्यम से इसे पूरा कर सकते हैं।
यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया दी गई है:
स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट पर जाएँ
सबसे पहले अपने मोबाइल या कंप्यूटर के ब्राउज़र में बिहार सरकार की आधिकारिक वेबसाइट खोलें:
👉 https://www.nagarseva.bihar.gov.in/
स्टेप 2: ‘Property Tax’ विकल्प चुनें
- होमपेज पर आपको ‘Property Tax’ या ‘Pay Property Tax’ का एक बड़ा आइकन दिखेगा। उस पर क्लिक करें।
स्टेप 3: नगर निकाय (Municipality) का चयन करें
एक नया पेज खुलेगा जहाँ आपको अपनी डिटेल्स चुननी होंगी:
- District (जिला): यहाँ ‘Muzaffarpur’ (मुजफ्फरपुर) चुनें।
- ULB (नगर निकाय): यहाँ सूची में से ‘Nagar Panchayat Sakra’ (नगर पंचायत सकरा) को चुनें।
- इसके बाद ‘Pay Property Tax’ बटन पर क्लिक करें।
स्टेप 4: अपनी प्रॉपर्टी खोजें (Search Property)
अब आपको अपनी प्रॉपर्टी ढूंढने के लिए कुछ जानकारी भरनी होगी। आप इनमें से किसी भी एक तरीके का उपयोग कर सकते हैं:
- Property ID (PID): अगर आपके पास पुरानी रसीद है, तो उस पर लिखा PID नंबर डालें। (यह सबसे सटीक तरीका है)।
- Old Holding No: पुराना होल्डिंग नंबर।
- Owner Name: मालिक का नाम और Ward No. (वार्ड संख्या) डालकर भी सर्च कर सकते हैं।
- जानकारी भरने के बाद ‘Search’ बटन पर क्लिक करें।

स्टेप 5: विवरण की जाँच करें (View Details)
सर्च करने के बाद नीचे आपकी प्रॉपर्टी का विवरण (मालिक का नाम, पता, बकाया राशि) दिखाई देगा।
- विवरण के बगल में दिए गए ‘View’ या ‘Pay Now’ बटन पर क्लिक करें।
- यहाँ आपको पिछले बकाये, चालू वर्ष के टैक्स और लागू छूट (Rebate) की पूरी जानकारी दिख जाएगी।
स्टेप 6: भुगतान करें (Online Payment)
- अपना मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी दर्ज करें।
- ‘I Agree to Terms and Conditions’ बॉक्स पर टिक करें।
- भुगतान के लिए अपना पसंदीदा माध्यम चुनें (जैसे: UPI (Google Pay/PhonePe), Debit Card, Credit Card या Net Banking)।
- पेमेंट सफल होने के बाद, स्क्रीन पर ‘Transaction Successful’ का मैसेज आएगा।
स्टेप 7: रसीद डाउनलोड करें (Download Receipt)
भुगतान के तुरंत बाद आपको ‘Download Receipt’ का विकल्प मिलेगा। इस रसीद को भविष्य के लिए सेव कर लें या प्रिंट निकाल लें।
कुछ जरूरी बातें:
- छूट का लाभ:, यदि आप इस समय से पहले भुगतान कर रहे हैं, तो सिस्टम स्वचालित (Automatically) रूप से आपके ब्याज और जुर्माने को शून्य कर देगा।
- सर्वर समस्या: यदि पेमेंट कट जाए और रसीद न मिले, तो 24-48 घंटे प्रतीक्षा करें। आमतौर पर रसीद अपडेट हो जाती है।
अगर आप अपना होल्डिंग नंबर (PID) भूल गए हैं, तो घबराने की जरूरत नहीं है। बिहार सरकार के ‘नगर सेवा‘ पोर्टल पर आप अपने नाम या वार्ड नंबर से इसे आसानी से खोज सकते हैं।
यहाँ स्टेप-बाय-स्टेप तरीका दिया गया है:
स्टेप 1: आधिकारिक वेबसाइट खोलें
सबसे पहले Nagarseva Bihar पोर्टल पर जाएं।
स्टेप 2: ‘Property Tax’ सेक्शन में जाएँ
- होमपेज पर ‘Search Property’ या ‘Pay Property Tax’ के विकल्प पर क्लिक करें।
- अब अपना District ( जैसे – Muzaffarpur) और अपना ULB (जैसे – Nagar Panchayat Sakra) चुनें।
स्टेप 3: सर्च करने के लिए वैकल्पिक जानकारी भरें
चूंकि आपके पास PID नहीं है, इसलिए आप नीचे दिए गए विवरणों का उपयोग करें:
- Ward No. (वार्ड संख्या): अपना वार्ड नंबर चुनें (यह अनिवार्य है ताकि लिस्ट छोटी हो जाए)।
- Owner Name (मालिक का नाम): संपत्ति के मालिक का नाम (अंग्रेजी में) दर्ज करें। ध्यान रहे कि स्पेलिंग वही हो जो कागजातों में है।
- Plot No. / Khata No. (प्लॉट/खाता संख्या): यदि आपको अपने जमीन का खाता या खेसरा नंबर याद है, तो उसे भरें।
स्टेप 4: ‘Search’ बटन पर क्लिक करें
- जैसे ही आप सर्च करेंगे, उस वार्ड के उन सभी लोगों की सूची आ जाएगी जिनका नाम आपके द्वारा दिए गए नाम से मिलता-जुलता है।
- सूची में अपना नाम, पिता/पति का नाम और पता ध्यान से देखें।
स्टेप 5: अपना PID नोट करें
- जब आपको अपनी प्रॉपर्टी मिल जाए, तो उसके ठीक बगल में ‘Property ID’ (PID) लिखा होगा। यह आमतौर पर 10-15 अंकों का एक यूनिक नंबर होता है।
- इसे कहीं लिखकर सुरक्षित रख लें, क्योंकि भविष्य में टैक्स भरने या रसीद निकालने के लिए सिर्फ इसी नंबर की जरूरत होगी।

अगर ऑनलाइन नाम नहीं मिल रहा है, तो क्या करें?
कभी-कभी डेटा एंट्री की गलती (Spelling Mistake) की वजह से नाम सर्च में नहीं आता। ऐसी स्थिति में:
- केवल वार्ड नंबर से खोजें: नाम वाले कॉलम को खाली छोड़ दें और सिर्फ अपना वार्ड नंबर चुनकर ‘Search’ दबाएं। उस वार्ड के सभी घरों की लिस्ट आ जाएगी, जिसमें से आप अपना नाम ढूंढ सकते हैं।
- ऑफलाइन मदद: आप अपनी पुरानी रजिस्ट्री की कॉपी या बिजली बिल लेकर नगर पंचायत के कार्यालय जा सकते हैं। वहां के क्लर्क अपने रजिस्टर (Assessment Register) से आपका होल्डिंग नंबर तुरंत खोज देंगे।
- हेल्पलाइन: अपने पार्षद से सम्पर्क करें, या अपने नगर पंचायत के द्वारा जारी हेल्प लाइन नम्बर की जानकारी प्राप्त करें, और नाम और वार्ड बताकर मदद मांग सकते हैं।
अगर आपने नया घर बनाया है या आपकी संपत्ति अभी तक नगर पंचायत के रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है, तो आपको Self-Assessment (स्व-निर्धारण) प्रक्रिया के जरिए नया होल्डिंग नंबर (PID) जेनरेट करना होगा।
बिहार में इसकी प्रक्रिया अब काफी पारदर्शी है। यहाँ इसका स्टेप-बाय-स्टेप तरीका दिया गया है:
1. आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)
नया रजिस्ट्रेशन शुरू करने से पहले इन कागजातों की स्कैन कॉपी (PDF/JPEG) तैयार रखें:
- पहचान पत्र: आधार कार्ड या पैन कार्ड।
- स्वामित्व का प्रमाण: जमीन की रजिस्ट्री (Sale Deed) या म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की कॉपी।
- बिजली बिल: पते के प्रमाण के रूप में।
- भवन का विवरण: निर्मित क्षेत्र (Built-up area) का माप (वर्ग फुट में)।

2. ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया (Step-by-Step)
- वेबसाइट पर जाएँ: Nagarseva Bihar पोर्टल खोलें।
- Apply for New Assessment: होमपेज पर ‘Property Tax’ सेक्शन में ‘New Assessment / Self Assessment’ के विकल्प पर क्लिक करें।
- निकाय का चुनाव: अपना जिला (Muzaffarpur) और नगर निकाय (Nagar Panchayat Sakra) चुनें।
- फॉर्म भरें (SAS Form): यहाँ आपको एक विस्तृत फॉर्म भरना होगा, जिसमें मुख्य रूप से 3 भाग होंगे:
- मालिक का विवरण: नाम, पिता का नाम, मोबाइल नंबर और आधार नंबर।
- संपत्ति का विवरण: वार्ड नंबर, खाता/खेसरा नंबर, सड़क का प्रकार (Principal Main Road/Main Road/Other Road)।
- निर्माण का विवरण: कुल जमीन का एरिया, कवर्ड एरिया (छत का क्षेत्रफल), मंजिल (G+1, G+2 आदि), और उपयोग का प्रकार (आवासीय या व्यावसायिक)।
- दस्तावेज अपलोड करें: मांगे गए स्थान पर रजिस्ट्री और आईडी प्रूफ की कॉपी अपलोड करें।
- सबमिट करें: फॉर्म को ध्यान से जाँचने के बाद ‘Submit’ बटन दबाएं। आपको एक ‘Application ID’ मिलेगी, इसे संभाल कर रखें।
3. वेरिफिकेशन और होल्डिंग नंबर का आवंटन
- जाँच: आपके द्वारा सबमिट किए गए आवेदन की नगर पंचायत के Tax Collector (TC) या संबंधित अधिकारी द्वारा ऑनलाइन और कभी-कभी भौतिक (Physical) जाँच की जाती है।
- अनुमोदन (Approval): विवरण सही पाए जाने पर कार्यपालक पदाधिकारी (Executive Officer) इसे अप्रूव करेंगे।
- PID जनरेशन: अप्रूवल के बाद आपका Property ID (PID) जेनरेट हो जाएगा, जो आपके रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आ जाएगा।
4. ऑफलाइन तरीका (वैकल्पिक)
अगर आपको ऑनलाइन फॉर्म भरने में दिक्कत आ रही है, तो:
- नगर पंचायत कार्यालय जाएँ: सकरा नगर पंचायत कार्यालय से ‘स्व-निर्धारण प्रपत्र‘ (SAS Form) प्राप्त करें।
- फॉर्म भरें: सभी विवरण हाथ से भरें और साथ में रजिस्ट्री व आधार की फोटोकॉपी लगाएं।
- जमा करें: इसे कार्यालय के ‘Property Tax’ काउंटर पर जमा कर दें। वहां से आपको एक पावती (Receipt) मिलेगी।

नगर पंचायत में करदाताओं को टैक्स (जैसे होल्डिंग टैक्स या संपत्ति कर) में छूट या माफी के नियम राज्य सरकार के नगर पालिका अधिनियमों पर आधारित होते हैं। आमतौर पर, यह छूट समय और विशिष्ट परिस्थितियों पर निर्भर करती है।
यहाँ मुख्य स्थितियाँ और समय दिए गए हैं जब टैक्स में छूट मिल सकती है:
1. समय पर भुगतान (Early Bird Rebate)
ज्यादातर नगर निकाय करदाताओं को प्रोत्साहित करने के लिए समय से पहले भुगतान पर छूट देते हैं:
- कब: आमतौर पर वित्तीय वर्ष की शुरुआत में (जैसे अप्रैल से जून के बीच)।
- छूट: यदि आप पूरे साल का टैक्स एक साथ जून तक जमा कर देते हैं, तो कई राज्यों में (जैसे बिहार और यूपी में) 5% से 10% तक की छूट दी जाती है।
2. विशिष्ट श्रेणी के करदाताओं के लिए (Special Categories)
कुछ विशेष परिस्थितियों में करदाताओं को स्थाई या आंशिक छूट मिलती है:
- वरिष्ठ नागरिक और दिव्यांग: 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों और शारीरिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को स्व-आवास (Self-occupied) संपत्ति पर 10% से 30% तक की अतिरिक्त छूट मिल सकती है।
- स्वतंत्रता सेनानी और पूर्व सैनिक: कई नगर पंचायतें शहीदों के परिवारों या पूर्व सैनिकों के लिए संपत्ति कर में विशेष छूट का प्रावधान रखती हैं।
- विधवा महिलाएं: कुछ क्षेत्रों में विधवा महिलाओं के नाम पर दर्ज मकानों के टैक्स में रियायत दी जाती है।
3. संपत्ति के प्रकार के आधार पर
- धार्मिक और धर्मार्थ स्थल: मंदिर, मस्जिद, चर्च या ऐसी धर्मशालाएं जहाँ कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं होती, उन्हें अक्सर टैक्स से पूरी तरह मुक्त रखा जाता है।
- सरकारी स्कूल और अस्पताल: सार्वजनिक स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़ी इमारतों को भी अक्सर छूट प्राप्त होती है।
- छोटी संपत्ति: बहुत छोटे घरों या कच्चे मकानों (जैसे 250-300 वर्ग फुट से कम) के लिए कई बार टैक्स की न्यूनतम राशि तय की जाती है या उसे माफ कर दिया जाता है।
4. वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) या ब्याज माफी योजना
- परिस्थिति: जब किसी पर सालों का टैक्स बकाया हो जाता है, तो सरकार समय-समय पर ‘समाधान योजना’ या ‘माफी योजना’ लाती है।
- छूट: इसमें मुख्य टैक्स तो देना होता है, लेकिन उस पर लगने वाले ब्याज (Interest) और जुर्माने (Penalty) को पूरी तरह या आंशिक रूप से माफ कर दिया जाता है। उदाहरण के लिए, वर्तमान में बिहार में 31 मार्च 2026 तक बकाया टैक्स जमा करने पर ब्याज माफी की योजना प्रभावी है।
छूट पाने के लिए आवश्यक दस्तावेज:
- पहचान पत्र: आधार कार्ड या पैन कार्ड।
- पात्रता प्रमाण: आयु प्रमाण पत्र (वरिष्ठ नागरिकों के लिए) या दिव्यांगता प्रमाण पत्र।
- स्वामित्व दस्तावेज: रजिस्ट्री के कागजात या होल्डिंग नंबर की रसीद।
महत्वपूर्ण नोट: यह नियम अलग-अलग राज्यों (जैसे बिहार, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश) में थोड़े भिन्न हो सकते हैं। सटीक जानकारी के लिए आपको अपनी स्थानीय नगर पंचायत के कार्यालय में संपर्क करना चाहिए।

नगर पंचायत में कर (टैक्स) से पूरी तरह मुक्ति या छूट कुछ खास वर्गों और संपत्तियों को दी जाती है। हालांकि इसके नियम अलग-अलग राज्यों के ‘नगर पालिका अधिनियम‘ के अनुसार थोड़े बदल सकते हैं, लेकिन सामान्य तौर पर निम्नलिखित श्रेणियों को टैक्स नहीं देना पड़ता है:
1. धार्मिक और सार्वजनिक स्थल
- सार्वजनिक पूजा स्थल: मंदिर, मस्जिद, चर्च, गुरुद्वारा और अन्य धार्मिक स्थल जो केवल पूजा के लिए उपयोग किए जाते हैं (यदि वहां से कोई व्यावसायिक आय या किराया नहीं आ रहा हो)।
- श्मशान और कब्रिस्तान: शवों के निपटान के लिए उपयोग की जाने वाली पंजीकृत भूमि या भवन।
2. सरकारी और सार्वजनिक संपत्ति
- केंद्र और राज्य सरकार की इमारतें: वे सरकारी भवन जिनका उपयोग केवल सार्वजनिक कार्यों के लिए होता है और जिनसे कोई लाभ नहीं कमाया जा रहा।
- सार्वजनिक पार्क और पुस्तकालय: नगर पंचायत के अधीन आने वाले सार्वजनिक पार्क, म्यूजियम और सार्वजनिक वाचनालय (Libraries)।
3. विशिष्ट श्रेणी के व्यक्ति
- शहीद परिवार और पूर्व सैनिक: कई राज्यों में (जैसे उत्तर प्रदेश और बिहार के कुछ निकायों में) स्वतंत्रता सेनानियों, शहीदों की विधवाओं और वीरता पुरस्कार विजेताओं के स्व-आवास (खुद के रहने वाले घर) को टैक्स से मुक्त रखा गया है।
- अत्यधिक निर्धन परिवार: बीपीएल (BPL) कार्ड धारक या वे लोग जो कच्ची झोपड़ियों या बहुत छोटे घरों (जैसे 250-300 वर्ग फुट से कम) में रहते हैं, उन्हें अक्सर सांकेतिक टैक्स (जैसे ₹250 सालाना) देना होता है या पूरी छूट मिल जाती है।
4. शैक्षणिक और धर्मार्थ संस्थान
- सरकारी स्कूल और अस्पताल: वे संस्थान जो पूरी तरह सरकार द्वारा संचालित हैं या जहाँ मुफ्त शिक्षा/इलाज दिया जाता है।
- पंजीकृत ट्रस्ट: धर्मार्थ ट्रस्ट (Charitable Trusts) द्वारा संचालित अनाथालय, वृद्धाश्रम या दिव्यांगों के लिए बने केंद्र।
5. कृषि भूमि
- नगर पंचायत की सीमा के भीतर आने वाली ऐसी भूमि जिसका उपयोग शुद्ध रूप से केवल खेती (Agriculture) के लिए किया जा रहा है और जहाँ कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ है, उसे अक्सर ‘होल्डिंग टैक्स‘ से बाहर रखा जाता है।
महत्वपूर्ण शर्तें:
- स्व-उपयोग (Self-Occupation): ज्यादातर छूट केवल तभी मिलती है जब संपत्ति का उपयोग मालिक खुद रहने के लिए या सेवा के लिए कर रहा हो। यदि उस संपत्ति का कोई हिस्सा किराए पर दिया गया है या वहां दुकान चल रही है, तो छूट खत्म हो जाती है।
- पंजीकरण: छूट पाने के लिए नगर पंचायत कार्यालय में आवेदन देना और पात्रता साबित करने वाले दस्तावेज (जैसे सैनिक प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र आदि) जमा करना अनिवार्य होता है।
नगर पंचायत में स्थित प्रेस कार्यालय को टैक्स देना पड़ता है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि उस कार्यालय का उपयोग किस रूप में हो रहा है और वह किस प्रकार की संपत्ति में स्थित है।
आमतौर पर, प्रेस कार्यालयों को टैक्स देना पड़ता है, क्योंकि उन्हें ‘व्यावसायिक’ (Commercial) या ‘अर्ध-व्यावसायिक’ (Semi-Commercial) श्रेणी में रखा जाता है।
छूट की संभावना (Exceptions):
कुछ विशेष परिस्थितियों में प्रेस को राहत मिल सकती है:
- मान्यता प्राप्त पत्रकार: कुछ राज्यों में अधिमान्य (Accredited) पत्रकारों के निजी आवास पर टैक्स में मामूली रियायत दी जाती है, लेकिन यह ‘प्रेस कार्यालय’ (Commercial Office) पर लागू नहीं होती।
- सरकारी विज्ञापन: यदि प्रेस कार्यालय पूरी तरह से सरकारी सूचना विभाग के अधीन या किसी ट्रस्ट द्वारा बिना लाभ के चलाया जा रहा हो, तो विशेष आवेदन पर छूट मिल सकती है।
नगर पंचायत क्षेत्र में रहने वाले जनप्रतिनिधियों (सांसद, विधायक, पार्षद या अध्यक्ष) के लिए टैक्स में छूट के नियम सामान्य नागरिकों से बहुत अलग नहीं होते हैं। भारतीय लोकतांत्रिक व्यवस्था में ‘समानता के अधिकार‘ के तहत, केवल पद के आधार पर टैक्स माफी का कोई संवैधानिक प्रावधान नहीं है।
1. पद के आधार पर छूट (No Exemption by Post)
- सांसद (MP) और विधायक (MLA): किसी भी सांसद या विधायक को उनके पद के कारण उनके निजी निवास या व्यावसायिक संपत्ति पर टैक्स में कोई कानूनी छूट नहीं मिलती है। उन्हें एक सामान्य नागरिक की तरह ही निर्धारित होल्डिंग टैक्स या संपत्ति कर देना पड़ता है।
- मुख्य पार्षद और पार्षद: नगर पंचायत के अध्यक्ष (मुख्य पार्षद) या वार्ड पार्षदों को भी पद पर रहते हुए अपने निजी मकानों पर टैक्स देना अनिवार्य है।
2. चुनाव लड़ने के लिए अनिवार्य “No Dues”
उल्टे, जनप्रतिनिधियों के लिए नियम और भी सख्त हैं। चुनाव लड़ने के समय (नामांकन के दौरान) सभी उम्मीदवारों को ‘अदेय प्रमाण पत्र‘ (No Dues Certificate) जमा करना होता है।
- यदि किसी जनप्रतिनिधि का नगर पंचायत का टैक्स बकाया है, तो वह चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य घोषित किया जा सकता है।
- अतः, जनप्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना पड़ता है कि उनका टैक्स समय पर जमा हो।
3. अप्रत्यक्ष लाभ (Indirect Benefits)
हालाँकि सीधे तौर पर टैक्स में छूट नहीं है, लेकिन कुछ राज्यों में उन्हें निम्नलिखित लाभ मिल सकते हैं:
- कार्यालय के लिए छूट: यदि किसी जनप्रतिनिधि का कार्यालय किसी सरकारी भवन में चल रहा है, तो उस भवन का टैक्स सरकारी विभाग (जैसे लोक निर्माण विभाग) द्वारा वहन किया जाता है, जनप्रतिनिधि को निजी तौर पर नहीं देना पड़ता।
- अन्य भत्ते: जनप्रतिनिधियों को उनके वेतन के साथ आवास भत्ता या कार्यालय रखरखाव भत्ता मिलता है, जिससे वे अपने करों का भुगतान कर सकते हैं।
4. सामान्य छूट की पात्रता (General Eligibility)
यदि कोई जनप्रतिनिधि किसी ऐसी श्रेणी में आता है जिसे सरकार ने सामान्य रूप से छूट दी है, तो वह उसका लाभ उठा सकता है:
- जैसे, यदि कोई विधायक वरिष्ठ नागरिक है या दिव्यांग है, तो उसे उस श्रेणी के तहत मिलने वाली 10% से 30% की छूट मिलेगी, न कि विधायक होने के नाते।
विशेष नोट: नगर पालिका अधिनियमों में यह स्पष्ट है कि “नगर पंचायत का कोई भी सदस्य या अधिकारी अपनी स्थिति का लाभ उठाकर करों से मुक्ति नहीं पा सकता।” यदि कोई ऐसा करता है, तो इसे ‘पद का दुरुपयोग‘ माना जाता है और उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई या पद से हटाने की प्रक्रिया शुरू की जा सकती है।
नगर पंचायत से ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट‘ (No Dues Certificate – NDC) या ‘अदेय प्रमाण पत्र‘ प्राप्त करना यह साबित करता है कि आपके ऊपर नगर निकाय का कोई भी टैक्स (जैसे होल्डिंग टैक्स, जल कर, या सफाई शुल्क) बकाया नहीं है।
यह प्रमाण पत्र चुनाव लड़ने, संपत्ति बेचने, या बैंक लोन लेने के लिए बहुत जरूरी होता है। इसकी प्रक्रिया नीचे दी गई है:
1. आवश्यक दस्तावेज (Documents Required)
आवेदन करने से पहले ये कागज तैयार रखें:
- नवीनतम टैक्स रसीद: पिछले वित्तीय वर्ष तक के भुगतान की रसीद।
- पहचान पत्र: आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र।
- स्वामित्व प्रमाण: रजिस्ट्री के कागजात या म्यूटेशन (दाखिल-खारिज) की कॉपी।
- होल्डिंग नंबर: अपनी संपत्ति का यूनिक आईडी नंबर।
2. आवेदन की प्रक्रिया (Application Process)
अ. ऑफलाइन प्रक्रिया (कार्यालय जाकर):
- फॉर्म प्राप्त करें: नगर पंचायत कार्यालय के ‘राजस्व विभाग’ (Revenue Department) से NDC का फॉर्म लें।
- बकाया जांचें: काउंटर पर क्लर्क से अपने होल्डिंग नंबर की जांच कराएं कि कोई बकाया तो नहीं है। यदि बकाया है, तो पहले उसे जमा करें और रसीद लें।
- फॉर्म जमा करें: भरे हुए फॉर्म के साथ पुरानी रसीदों की फोटोकॉपी लगाकर जमा करें।
- निरीक्षण: कुछ मामलों में वार्ड पार्षद या टैक्स कलेक्टर से रिपोर्ट लगवानी पड़ती है कि मौके पर कोई नया अवैध निर्माण नहीं है।
- प्रमाण पत्र प्राप्त करें: आमतौर पर 3 से 7 कार्य दिवसों में कार्यपालक पदाधिकारी (Executive Officer) के हस्ताक्षर के बाद आपको सर्टिफिकेट मिल जाता है।
ब. ऑनलाइन प्रक्रिया (यदि उपलब्ध हो):
कई राज्यों (जैसे बिहार में e-nagarsewa या यूपी में e-nagarsewaup) ने इसे ऑनलाइन कर दिया है:
- नगर विकास विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- ‘Property Tax’ या ‘No Dues Certificate’ विकल्प चुनें।
- अपना जिला और नगर पंचायत चुनें और होल्डिंग नंबर दर्ज करें।
- यदि सारा टैक्स जमा है, तो सीधे ‘Download NDC’ का विकल्प आ जाता है।
3. विशेष नियम और शुल्क
- आवेदन शुल्क: NDC जारी करने के लिए नगर पंचायत एक छोटा सा ‘सर्टिफिकेट शुल्क’ लेती है (आमतौर पर ₹100 से ₹500 के बीच)।
- समय सीमा: ‘लोक सेवाओं के अधिकार’ (RTPS) के तहत कई राज्यों में इसे 7 से 15 दिनों के भीतर देना अनिवार्य है।
- अस्थायी छूट (Amnesty Scheme): यदि आप पर सालों का ब्याज बकाया है, तो मार्च के महीने में अक्सर ‘ब्याज माफी योजना’ आती है। उस समय कम पैसों में बकाया चुकाकर NDC लेना आसान होता है।
सुझाव: यदि आप चुनाव के लिए NDC बनवा रहे हैं, तो अंतिम समय की भीड़ से बचने के लिए इसे नामांकन से कम से कम 10 दिन पहले ही अप्लाई कर दें।
भारत के विभिन्न राज्यों में नगर निकायों (नगर पंचायत, नगर परिषद, नगर निगम) के टैक्स भुगतान और ‘नो ड्यूज सर्टिफिकेट’ के लिए अलग-अलग आधिकारिक पोर्टल बनाए गए हैं।
आप जिस भी राज्य से हैं, उसके सामने दिए गए लिंक का उपयोग कर सकते हैं:
1. बिहार (Bihar)
बिहार में सभी नगर निकायों का केंद्रीकृत पोर्टल ‘e-Nagarsewa’ है।
- वेबसाइट: pmcptax.bihar.gov.in (पटना के लिए) या nagarseva.bihar.gov.in
- सेवाएँ: होल्डिंग टैक्स का भुगतान, रसीद डाउनलोड और बकाया राशि की जाँच।
2. उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh)
यूपी के नगर निगमों और नगर पंचायतों के लिए अलग-अलग लिंक हो सकते हैं, लेकिन मुख्य पोर्टल यह है:
- वेबसाइट: e-nagarsewaup.gov.in
- सेवाएँ: प्रॉपर्टी टैक्स (House Tax) सर्च, ऑनलाइन भुगतान और म्यूटेशन (नाम परिवर्तन)।
3. मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh)
मध्य प्रदेश में ‘e-NagarPalika’ पोर्टल सबसे उन्नत प्रणालियों में से एक है।
- वेबसाइट: mpenagarpalika.gov.in
- सेवाएँ: नो ड्यूज सर्टिफिकेट (NDC) के लिए आवेदन, संपत्ति कर, जल कर और ट्रेड लाइसेंस।
4. राजस्थान (Rajasthan)
राजस्थान में शहरी विकास कर (UD Tax) के नाम से यह सेवा उपलब्ध है।
- वेबसाइट: lsgonline.rajasthan.gov.in या udhonline.rajasthan.gov.in
- सेवाएँ: अपनी प्रॉपर्टी आईडी (PID) खोजना और बकाया टैक्स जमा करना।
5. छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh)
- वेबसाइट: taxportal.cg.gov.in
- सेवाएँ: सभी नगर निगमों और पंचायतों के लिए टैक्स रिटर्न फाइलिंग और ऑनलाइन भुगतान।
ऑनलाइन चेक करने का तरीका:
- ऊपर दी गई अपनी राज्य की वेबसाइट पर जाएँ।
- ‘Property Tax’ या ‘Citizen Services’ पर क्लिक करें।
- अपना ‘Holding Number’ या ‘Property ID’ दर्ज करें। (यह आपकी पुरानी टैक्स रसीद पर लिखा होता है)।
- यदि आपके पास आईडी नहीं है, तो आप ‘Search by Name/Address’ का विकल्प चुनकर अपनी संपत्ति ढूंढ सकते हैं।
- वहाँ आपको ‘Pay Due’ या ‘Download NDC’ का विकल्प दिखाई देगा।
सुझाव: यदि आप ‘अदेय प्रमाण पत्र’ (No Dues) पहली बार ऑनलाइन ले रहे हैं, तो सुनिश्चित करें कि आपके पिछले सभी ऑफलाइन भुगतान पोर्टल पर अपडेट हो चुके हों।
| मुख्य बिंदु | विस्तार/जानकारी |
| विकास का इंजन | आपका टैक्स ही सड़कों पर स्ट्रीट लाइट, घर-घर कचरा उठाव और साफ नालियों का आधार है। |
| होल्डिंग टैक्स | यह संपत्ति के क्षेत्रफल और सड़क के प्रकार (मुख्य या अन्य) के आधार पर तय होता है। |
| ट्रेड लाइसेंस | किसी भी दुकान या व्यवसाय के लिए यह अनिवार्य है; बिना लाइसेंस व्यवसाय पर सीलिंग या जुर्माना संभव है। |
| बड़ी छूट | 31 मार्च 2026 तक पुराना बकाया जमा करने पर ब्याज और जुर्माने में 100% की छूट मिल रही है। |
| डिजिटल सुविधा | अब आप ‘नगरसेवा‘ (Nagarseva) पोर्टल के जरिए घर बैठे टैक्स भुगतान और म्यूटेशन कर सकते हैं। |
नगर निगम या नगर पंचायत के कर (टैक्स) का भुगतान न करना केवल एक नागरिक जिम्मेदारी की अनदेखी नहीं है, बल्कि यह कानूनी रूप से भी भारी पड़ सकता है। बिहार नगरपालिका अधिनियम (Bihar Municipal Act) के तहत, टैक्स न देने पर निकाय प्रशासन के पास कई सख्त अधिकार होते हैं।
यदि कोई व्यक्ति टैक्स नहीं देता है, तो चरणबद्ध तरीके से निम्नलिखित कार्रवाइयां हो सकती हैं:
1. भारी ब्याज और जुर्माना (Interest and Penalty)
सबसे पहले आर्थिक बोझ बढ़ता है।
- ब्याज: बकाया राशि पर मासिक आधार पर ब्याज (Penal Interest) जोड़ दिया जाता है। बिहार में आमतौर पर यह 1.5% से 2% प्रति माह तक हो सकता है।
- जुर्माना: समय सीमा बीतने के बाद एकमुश्त जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
2. सरकारी सुविधाओं और सेवाओं पर रोक
टैक्स न भरने वाले व्यक्ति को नगर पंचायत द्वारा दी जाने वाली कई व्यक्तिगत सेवाओं से वंचित किया जा सकता है:
- No Dues Certificate (NDC): आपको ‘अदेय प्रमाण पत्र’ नहीं मिलेगा, जिसके बिना आप अपनी संपत्ति बेच नहीं सकते, न ही उस पर बैंक से लोन ले सकते हैं।
- नक्शा पास न होना: यदि आप घर का विस्तार करना चाहते हैं या नया निर्माण करना चाहते हैं, तो बकाया होने पर आपका नक्शा पास नहीं किया जाएगा।
- पानी का कनेक्शन: कई मामलों में जल कर जमा न करने पर पानी का कनेक्शन काटने का प्रावधान है।
3. कानूनी नोटिस और डिमांड नोटिस (Demand Notice)
जब बकाया एक निश्चित सीमा से ऊपर चला जाता है, तो नगर पंचायत धारा 144 या संबंधित धाराओं के तहत डिमांड नोटिस जारी करती है। इसमें 15 से 30 दिनों का समय दिया जाता है।
4. चल-अचल संपत्ति की कुर्की (Attachment of Property)
यदि नोटिस के बावजूद टैक्स जमा नहीं होता है, तो नगरपालिका कानून प्रशासन को यह अधिकार देते हैं कि:
- कुर्की-जब्ती: बकाया वसूलने के लिए घर के कीमती सामान (जैसे वाहन या अन्य चल संपत्ति) को जब्त किया जा सकता है।
- बैंक खाता सीज करना: प्रशासन संबंधित व्यक्ति के बैंक खाते को फ्रीज (Freeze) करने के लिए बैंक को आदेश दे सकता है।
- संपत्ति की नीलामी: बहुत बड़े बकाया के मामलों में, बकाया राशि की वसूली के लिए उस संपत्ति की नीलामी तक की जा सकती है।
5. ट्रेड लाइसेंस रद्द होना (व्यवसायियों के लिए)
यदि कोई दुकानदार या व्यवसायी टैक्स नहीं भरता है, तो उसका ट्रेड लाइसेंस (Trade License) रद्द किया जा सकता है, जिससे उसका व्यवसाय अवैध हो जाएगा और दुकान सील की जा सकती है।
6. चुनाव लड़ने पर रोक
जैसा कि हमने पहले चर्चा की, यदि कोई व्यक्ति नगर पंचायत या किसी भी निकाय का चुनाव लड़ना चाहता है और उसका टैक्स बकाया है, तो उसका नामांकन रद्द कर दिया जाता है।
बचाव का तरीका: समाधान योजना
सरकार समय-समय पर ‘एमनेस्टी स्कीम‘ (Amnesty Scheme) या ‘ब्याज माफी योजना’ लाती है। यदि कोई व्यक्ति लंबे समय से टैक्स नहीं दे पाया है, तो वह ऐसी योजनाओं का लाभ उठाकर केवल मूल राशि (Principal Amount) जमा कर सकता है और भारी ब्याज से बच सकता है।
यदि कोई व्यक्ति पहले से ही बैंक का कर्जदार है, तो नगर पंचायत या नगर निगम के टैक्स बकाया होने पर स्थिति और भी जटिल हो सकती है। कानून की नजर में बैंक का कर्ज (Bank Loan) और सरकारी टैक्स (Municipal Tax) दो अलग-अलग वित्तीय जिम्मेदारियां हैं।
यहाँ विस्तार से समझिए कि इस स्थिति में क्या कानूनी और व्यावहारिक परिणाम होते हैं:
1. संपत्ति पर “प्रथम प्रभार” (First Charge) का नियम
कानूनी रूप से, किसी भी संपत्ति पर सरकारी टैक्स (जैसे होल्डिंग टैक्स) का ‘प्रथम प्रभार‘ (First Charge) होता है।
- इसका मतलब है कि यदि किसी संपत्ति की नीलामी होती है, तो प्राप्त राशि में से सबसे पहले नगर निकाय का टैक्स चुकाया जाएगा, उसके बाद बैंक अपना कर्ज वसूलेगा।
- यदि बैंक उस संपत्ति को जब्त कर नीलाम करना चाहता है, तो उसे भी पहले नगर पंचायत का ‘No Dues’ (अदेय प्रमाण पत्र) लेना पड़ता है या बकाया टैक्स का भुगतान करना पड़ता है।
2. सिबिल स्कोर (CIBIL Score) पर असर
आजकल नगर निकाय अपने रिकॉर्ड को डिजिटल कर रहे हैं।
- यदि आप बैंक के कर्जदार हैं और साथ ही सरकारी टैक्स भी नहीं भर रहे हैं, तो भविष्य में आपकी वित्तीय विश्वसनीयता (Creditworthiness) खत्म हो जाती है।
- हालांकि वर्तमान में नगर पंचायत का टैक्स सीधे सिबिल (CIBIL) से नहीं जुड़ा है, लेकिन कई राज्यों में अब इसे आधार से जोड़ा जा रहा है, जिससे भविष्य में नया लोन लेना नामुमकिन हो सकता है।
3. बैंक लोन के नवीनीकरण (Renewal) में बाधा
यदि आपने अपनी संपत्ति (घर या दुकान) पर ‘बिजनेस लोन’ या ‘ओडी लिमिट’ (OD Limit) ले रखी है:
- बैंक हर साल या एक निश्चित अंतराल पर ‘No Dues Certificate’ या ‘Latest Tax Receipt’ मांगता है।
- यदि आप टैक्स रसीद पेश नहीं कर पाते, तो बैंक आपके लोन का नवीनीकरण रोक सकता है या उसे ‘NPA’ (Non-Performing Asset) की श्रेणी में डाल सकता है।
4. दोहरी कानूनी कार्रवाई का जोखिम
- बैंक की ओर से: बैंक SARFAESI Act के तहत आपकी संपत्ति की नीलामी की प्रक्रिया शुरू कर सकता है।
- नगर पंचायत की ओर से: नगर पंचायत बिहार नगरपालिका अधिनियम के तहत ‘डिमांड नोटिस’ जारी कर संपत्ति की कुर्की कर सकती है।
- ऐसी स्थिति में व्यक्ति ‘दो पाटों के बीच’ फंस जाता है, जहाँ घर बचाने के लिए उसे दोनों तरफ भुगतान करना अनिवार्य हो जाता है।
राहत की बात: क्या किया जा सकता है?
यदि आप वित्तीय तंगी (Financial Crisis) के कारण दोनों का भुगतान नहीं कर पा रहे हैं, तो ये कदम उठाएं:
- नगर पंचायत में आवेदन: आप कार्यपालक पदाधिकारी (Executive Officer) को अपनी वित्तीय स्थिति का हवाला देते हुए एक आवेदन दे सकते हैं ताकि कम से कम जुर्माना (Penalty) माफ किया जा सके और आप किश्तों (Installments) में टैक्स जमा कर सकें।
- प्राथमिकता तय करें: हमेशा याद रखें कि टैक्स की राशि लोन की तुलना में बहुत कम होती है। इसे चुकाकर कम से कम सरकारी कार्रवाई और संपत्ति पर ‘प्रथम प्रभार’ के जोखिम को खत्म किया जा सकता है।
टैक्स की वसूली बनाम आर्थिक सशक्तिकरण: क्या नगर पंचायतें सिर्फ ‘लेने’ वाली संस्था हैं या ‘देने’ वाली भी?
“अक्सर यह सवाल सार्वजनिक चर्चा का केंद्र बनता है कि जब नगर पंचायतें अपने क्षेत्र के निवासियों, व्यवसायियों और संस्थानों से विभिन्न मदों में टैक्स वसूलती हैं, तो क्या उनके पास आम लोगों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से आर्थिक लाभ पहुँचाने की भी कोई शक्ति है? क्या नगर पंचायत का दायित्व केवल सफाई और रोशनी तक सीमित है, या वह आम आदमी को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए भी कोई ठोस योजनाएं चला रही है?”
नगर पंचायत केवल एक ‘कर संग्राहक’ (Tax Collector) संस्था नहीं है, बल्कि यह जमीनी स्तर पर आर्थिक बदलाव की वाहक भी है। बिहार की नगर पंचायतों में आम लोगों को वित्तीय रूप से मजबूत करने के लिए निम्नलिखित प्रमुख योजनाएं और तंत्र कार्य कर रहे हैं:
1. दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय शहरी आजीविका मिशन (DAY-NULM)
यह नगर पंचायतों की सबसे प्रमुख योजना है जो सीधे तौर पर लोगों की जेब और रोजगार से जुड़ी है:
- स्वरोजगार ऋण (SEP): यदि आप अपना छोटा व्यवसाय (जैसे दुकान, सिलाई केंद्र, मोबाइल रिपेयरिंग आदि) शुरू करना चाहते हैं, तो नगर पंचायत के माध्यम से ₹2 लाख तक का व्यक्तिगत ऋण और ₹10 लाख तक का समूह ऋण बहुत कम ब्याज (अक्सर 7%) पर मिलता है।
- कौशल प्रशिक्षण (EST&P): युवाओं को मुफ्त में कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, ब्यूटीशियन आदि का कोर्स कराया जाता है और साथ ही नौकरी (Placement) दिलाने में मदद की जाती है।
- स्वयं सहायता समूह (SHG): शहरी गरीब महिलाओं को समूहों में जोड़कर उन्हें ‘रिवॉल्विंग फंड’ (आरंभिक राशि) दी जाती है ताकि वे छोटा व्यापार शुरू कर सकें।
2. पीएम स्वनिधि (PM SVANidhi) योजना
यह विशेष रूप से रेहड़ी-पटरी वालों (Street Vendors) के लिए है।
- नगर पंचायत इन वेंडर्स को पहचान पत्र (ID Card) देती है और बिना किसी गारंटी के ₹10,000 से ₹50,000 तक का ऋण बैंक से दिलवाती है। समय पर भुगतान करने पर ब्याज में भारी छूट और डिजिटल लेनदेन पर कैश-बैक भी मिलता है।
3. मुख्यमंत्री महिला उद्यमी/युवा उद्यमी योजना
यद्यपि यह जिला स्तर की योजना है, लेकिन इसके चयन और सत्यापन में नगर निकायों की भूमिका होती है।
- आर्थिक सहायता: नए उद्योग लगाने के लिए ₹10 लाख तक की मदद दी जाती है, जिसमें से ₹5 लाख अनुदान (सब्सिडी) के रूप में माफ होता है और बाकी ₹5 लाख बिना ब्याज (महिलाओं के लिए) या मात्र 1% ब्याज (युवाओं के लिए) पर लौटाना होता है।
4. मुख्यमंत्री महिला रोज़गार योजना (नया अपडेट – 2026)
बिहार सरकार द्वारा हाल ही में शुरू की गई इस योजना के तहत शहरी क्षेत्रों की महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ₹2 लाख तक की अतिरिक्त वित्तीय सहायता दी जा रही है। इसका क्रियान्वयन ‘जीविका’ और ‘नगर निकाय’ के सहयोग से किया जा रहा है।
5. पिंक बस और ई-रिक्शा अनुदान
शहरी परिवहन को बढ़ावा देने और महिलाओं को रोजगार देने के लिए, बिहार सरकार नगर निकायों के माध्यम से महिलाओं को ई-रिक्शा या दोपहिया वाहन खरीदने पर नकद अनुदान (Subsidy) प्रदान कर रही है।
कर वसूलने और सुविधा देने का संबंध: नगर पंचायत द्वारा वसूला गया टैक्स एक ‘बीज’ की तरह है। जब आप टैक्स देते हैं, तो नगर पंचायत का ढांचा मजबूत होता है, जिससे:
- बुनियादी ढांचा (Infrastructure): अच्छी सड़कें और लाइटें व्यापार को आसान बनाती हैं।
- सरकारी गारंटी: टैक्स देने वाला नागरिक जब बैंक के पास स्वरोजगार के लिए जाता है, तो नगर पंचायत उसकी पहचान और पात्रता की गारंटी (Recommendation) देती है।
- संपत्ति की वैल्यू: आपके द्वारा दिया गया टैक्स शहर का विकास करता है, जिससे आपकी संपत्ति की कीमत (Market Value) बढ़ती है, जो आपकी एक परोक्ष (Indirect) आर्थिक मजबूती है।
यह आलेख नगर पंचायत (विशेषकर बिहार के संदर्भ में) की कार्यप्रणाली, राजस्व संग्रहण और नागरिक अधिकारों के बीच के गहरे संबंध को रेखांकित करता है। इसका मुख्य उद्देश्य पाठकों को यह समझाना है कि उनके द्वारा दिया गया टैक्स—चाहे वह होल्डिंग टैक्स हो या ट्रेड लाइसेंस शुल्क—शहर की बुनियादी सुविधाओं (सड़क, बिजली, सफाई) का ‘लाइफब्लड’ (रक्त) है।



