कुर्सेला (कटिहार) | 12 फरवरी, 2026

बिहार के कटिहार जिले के कुर्सेला में आज श्रद्धा, संकल्प और गांधीवादी विचारधारा का एक अद्भुत त्रिवेणी संगम देखने को मिला। अवसर था राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अस्थि भस्म विसर्जन के 78वें पुण्य स्मृति दिवस का। गंगा-कोसी के मिलन स्थल पर आयोजित इस समारोह ने न केवल बापू की शहादत को नमन किया, बल्कि उनके ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को वर्तमान संदर्भ में फिर से परिभाषित करने का प्रयास भी किया।

प्रभात फेरी: जन-जन तक पहुँचा गांधी का संदेश

कार्यक्रम की शुरुआत सुबह अत्यंत गरिमामयी ढंग से हुई। कुर्सेला स्थित ऐतिहासिक गांधी आश्रम से एक भव्य प्रभात फेरी निकाली गई। इसमें सैकड़ों की संख्या में गांधीवादी कार्यकर्ता, स्थानीय ग्रामीण और युवा शामिल हुए। हाथों में तिरंगा लिए और ‘गांधी अमर रहे’ के नारों के साथ यह पदयात्रा तीनघरिया गांव के मुख्य मार्गों से गुजरी। गांव की गलियां ‘रघुपति राघव राजा राम’ के मधुर भजनों से गूंज उठीं। प्रभात फेरी का समापन गंगा के तट पर हुआ, जहाँ से सभी नावों के माध्यम से पवित्र गंगा-कोसी संगम के बीचों-बीच पहुंचे। वहां प्रवाहित जलधारा के बीच बापू के तैल चित्र पर माल्यार्पण किया गया और उन्हें कोटि-कोटि नमन किया गया।

श्रद्धांजलि सभा: “गांधी का ग्राम स्वराज ही बचाएगा संविधान”

संगम पर जल तर्पण के पश्चात गांधी आश्रम परिसर में एक विशाल श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता हरिजन सेवक संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. शंकर सन्याल ने की। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि गांधी केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक शाश्वत विचार हैं।

स्वागत संबोधन और वैचारिक विमर्श: राष्ट्रीय उपाध्यक्ष सह पूर्व राज्यसभा सांसद नरेश यादव ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कुर्सेला की इस धरती के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की रूपरेखा प्रदेश अध्यक्ष रामकुमार मंडल ने प्रस्तुत की। उन्होंने गांधीजी के सिद्धांत और दर्शन को आज की अराजकता के दौर में एकमात्र विकल्प बताया। मंच का कुशल संचालन संजय भाई द्वारा किया गया।

प्रमुख वक्ताओं के विचार: जवाहर ज्योति बाल विकास केंद्र की कार्यकारिणी सदस्य ललिता कुमारी और राष्ट्र सेवा दल के जिला कार्याध्यक्ष रविन्द्र पासवान ने संयुक्त रूप से वर्तमान वैश्विक और राष्ट्रीय परिस्थितियों पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने पुरजोर तरीके से कहा कि:

“आज जब दुनिया कट्टरता और हिंसा की ओर बढ़ रही है, तब गांधी का ग्राम स्वराज और कुटीर उद्योग ही भारतीय संविधान की मूल भावना की रक्षा करेगा। गैर-बराबरी, अशिक्षा, बेरोजगारी और सामाजिक अराजकता को दूर कर न्याय व समता पर आधारित समाज का निर्माण गांधीवादी रास्ते से ही संभव है।”

समाज के हर वर्ग की भागीदारी (प्रमुख उपस्थित जन)

इस अवसर पर क्षेत्र के गणमान्य व्यक्तियों और कार्यकर्ताओं की उपस्थिति ने इसे एक जन आंदोलन का रूप दे दिया। कार्यक्रम में मुख्य रूप से निम्नलिखित लोगों ने भाग लेकर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की:

  • प्रमुख नेतृत्व: गांधी आश्रम के अध्यक्ष महेश राय, मुखिया ललन राम, पंच सरपंच संघ के प्रदेश उपाध्यक्ष किरण देव यादव, विकास पथ बिक्रम के सचिव सत्येंद्र शांडिल्य।
  • सक्रिय भागीदारी: अतुल भाई, सुजान भाई, विजय भाई (जिनका तिरंगा झंडा के साथ विशेष आउटलुक चर्चा का विषय रहा), आशुतोष कुमार और श्याम भाई (जिन्होंने स्वच्छता का संदेश दिया)।
  • महिला शक्ति की अभूतपूर्व उपस्थिति: कार्यक्रम में महिलाओं की भागीदारी विशेष रही, जिनमें रुक्मिणी साहा, राजो देवी, इसरत खातून, रातो देवी, मिर्जा देवी, मंजू वर्मा, रुक्मिणी देवी, मंजू देवी, प्रियंका देवी, हीरा देवी, कंचन देवी, नीरा देवी, रेखा देवी, रीता देवी और गायत्री कुमारी प्रमुख थीं।

गीतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बापू को नमन

कार्यक्रम केवल भाषणों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोक कलाओं के माध्यम से भी बापू के प्रति प्रेम प्रदर्शित किया गया। सुनील कुमार ने जब जनगीत वक्त की आवाज है मिलके चलो, मिलकर बढ़ो” प्रस्तुत किया, तो पूरा पंडाल तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। वहीं श्याम भाई ने अपने गांधीवादी पहनावे और अंदाज से बापू के स्वच्छता अभियान को जीवंत कर दिया।

सांस्कृतिक संध्या: देर शाम सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन हुआ, जिसमें स्थानीय कलाकारों ने अपनी प्रतिभा बिखेरी। चांदनी कुमारी, चंदा कुमारी, संदीप कुमार, आशीष कुमार, मुस्कान कुमारी, संगीता कुमारी, बबीता कुमारी, नीतू कुमारी, जिन्नत परवीन, गायत्री कुमारी, रितु कुमारी और नेहा कुमारी ने लोकगीत, संगीत और नृत्य की ऐसी त्रिवेणी बहाई कि श्रोता उसमें गोते लगाते नजर आए। इन गीतों में शांति, सद्भाव और आपसी भाईचारे का संदेश छिपा था। कुर्सेला की मिट्टी में आज भी बापू के विचार रचे-बसे हैं और नई पीढ़ी उन्हें आगे बढ़ाने के लिए तत्पर है।

शांति और सद्भाव की प्रासंगिकता :कार्यक्रम के समापन पर रविन्द्र पासवान ने पुनः दोहराया कि गांधीजी का दर्शन—सत्य, अहिंसा, सेवा, करुणा, दया, प्रेम, भाईचारा, शांति और सद्भाव—आज पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। जब तक समाज में अंतिम व्यक्ति का उदय नहीं होगा, तब तक गांधी का सपना अधूरा है।

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