ताजपुर/समस्तीपुर | 1 फरवरी 2026

बिहार के समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड अंतर्गत मोतीपुर में किसानों का आक्रोश फूट पड़ा है। किसान रजिस्ट्री की पेचीदगियों, वंशावली की अनिवार्यता, खाद की किल्लत और सरकार की कथित ‘किसान विरोधी’ नीतियों के खिलाफ अखिल भारतीय किसान महासभा ने शंखनाद कर दिया है। रविवार को मोतीपुर वार्ड संख्या 26 में आयोजित जुलूस और सभा ने स्पष्ट कर दिया है कि आने वाले दिन सरकार के लिए चुनौतीपूर्ण होने वाले हैं।


पंजीकरण नहीं, यह तो किसानों को बेदखल करने का डिजिटल जालहै

सभा को संबोधित करते हुए मुख्य वक्ता और अखिल भारतीय किसान महासभा के जिला सचिव ललन कुमार ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि वर्तमान में किसान रजिस्ट्रेशन के नाम पर जो प्रक्रिया अपनाई जा रही है, वह वास्तव में किसानों को सरकारी लाभों से वंचित करने की एक गहरी साजिश है।

ललन कुमार ने  दावा करते हुए कहा कि, “आज किसान पंजीकरण के नाम पर जो धांधली हो रही है, उसमें 90 प्रतिशत किसान छंटनी की कगार पर हैं“। उन्होंने विस्तार से बताया कि जो किसान पीढ़ियों से अपनी भूमि जोत रहे हैं और जिनके पास पुस्तैनी जमीन है, उन्हें भी तकनीकी आधार पर रजिस्ट्रेशन से बाहर किया जा रहा है। यदि यह पंजीकरण सफल नहीं होता है, तो किसानों को भविष्य में न तो उचित दर पर खाद मिलेगी, न ही बीज और न ही प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि का लाभ। उन्होंने इसे केंद्र और राज्य सरकार की मिलीजुली साजिश करार दिया।


खाद की कीमतों पर चोरी और सीनाजोरीका आरोप

महासभा के प्रखंड अध्यक्ष ब्रह्मदेव प्रसाद सिंह ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में आर्थिक आंकड़ों के जरिए सरकार को घेरा। उन्होंने बताया कि सरकार किसानों की आंखों में धूल झोंक रही है। उन्होंने कहा, “पहले 45 किलो यूरिया की बोरी 266.50 रुपये में मिलती थी, लेकिन अब मोदी सरकार ने चालाकी से वजन घटाकर इसे 40 किलो कर दिया है और कीमत 254 रुपये तय की है”। यह सीधे तौर पर किसानों की जेब पर डाका डालने जैसा है।

इसके साथ ही, वक्ताओं ने क्षेत्र में खाद की भारी कालाबाजारी पर भी चिंता व्यक्त की और इसे तत्काल बंद करने की मांग की,


तकनीकी खामियां और जमाबंदी का पेच

भाकपा माले के प्रखंड सचिव सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने प्रशासन के समक्ष व्यावहारिक सुझाव और मांग रखते हुए कहा कि किसान रजिस्ट्री की प्रक्रिया शुरू करने से पहले सरकार को अपने बुनियादी रिकॉर्ड दुरुस्त करने चाहिए। उन्होंने मांग की कि राजस्व महाअभियान के तहत सबसे पहले जमाबंदी पंजी में सुधार किया जाए और प्रत्येक भूखंड का खाता-खेसरा स्पष्ट रूप से दर्ज किया जाए। जब तक राजस्व रिकॉर्ड अपडेट नहीं होंगे, तब तक वास्तविक किसानों का पंजीकरण होना असंभव है और वे बिचौलियों के हत्थे चढ़ते रहेंगे।


आंदोलन की प्रमुख मांगें एक नजर में:

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने एक स्वर में निम्नलिखित मांगों को बुलंद किया:

  • वंशावली का समावेश: किसान रजिस्ट्री में वंशावली को अनिवार्य रूप से शामिल किया जाए ताकि पुश्तैनी किसानों को दिक्कत न हो।
  • MSP की गारंटी: सभी फसलों पर न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) को कानूनी दर्जा देकर लागू किया जाए।
  • कर्ज मुक्ति: किसानों का केसीसी (KCC) लोन पूर्णतः माफ किया जाए।
  • संस्थानों की बहाली: मनरेगा को कृषि कार्य से जोड़ते हुए पुनर्बहाल किया जाए और बंद पड़ी बाजार समितियों को फिर से चालू किया जाए।
  • अधिग्रहण पर रोक: कृषि योग्य भूमि का गैर-जरूरी अधिग्रहण तत्काल बंद हो।

अगला पड़ाव: प्रखंड से विधानसभा तक घेराव

मोतीपुर की गलियों से निकले इस जुलूस ने सरकार को स्पष्ट चेतावनी दे दी है। सभा के अंत में आंदोलन की आगामी रूपरेखा की घोषणा की गई:

  1. 9 फरवरी 2026: मांगों के समर्थन में ताजपुर प्रखंड मुख्यालय का ऐतिहासिक घेराव किया जाएगा।
  2. 23 फरवरी 2026: आंदोलन का रुख राजधानी की ओर होगा, जहाँ किसान अपनी मांगों को लेकर बिहार विधानसभा का घेराव करेंगे।

सभा में राजदेव प्रसाद सिंह, शंकर सिंह, ललन दास, अनील सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, मोती लाल सिंह, दिनेश प्रसाद सिंह, संजीव राय, मुंशीलाल राय और धर्मेंद्र राय सहित सैकड़ों किसानों ने हिस्सा लिया और संकल्प लिया कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जातीं, संघर्ष जारी रहेगा।

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