समस्तीपुर/मुजफ्फरपुर । डा० राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा स्थित ‘जलवायु परिवर्तन पर उच्च अध्ययन केन्द्र’ ने उत्तर बिहार के किसानों और आम जनजीवन के लिए मौसम का ताजा बुलेटिन जारी किया है । ग्रामीण कृषि मौसम सेवा द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, अगले कुछ दिनों में उत्तर बिहार के जिलों में मौसम के मिजाज में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है ।

पिछले बीते तीन दिनों के आंकड़ों का विश्लेषण करते हुए मौसम वैज्ञानिकों ने बताया कि पूसा स्थित मौसमीय बेधशाला में औसत अधिकतम तापमान 31.3 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 19.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया । इस दौरान सुबह के समय सापेक्ष आर्द्रता का औसत 97 प्रतिशत और दोपहर में 67 प्रतिशत रहा । हवा की औसत गति 3.8 किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जबकि सूर्य के प्रकाश की अवधि औसतन 3.0 घंटे प्रतिदिन रही । पिछले तीन दिनों में मौसम पूरी तरह शुष्क बना रहा ।
अगले 5 दिनों का पूर्वानुमान: बारिश और ओलावृष्टि की आशंका विश्वविद्यालय द्वारा 14 से 18 मार्च 2026 तक के लिए जारी मध्यावधि पूर्वानुमान के अनुसार, क्षेत्र में एक नया मौसमी सिस्टम सक्रिय हो रहा है । इस सिस्टम के प्रभाव से उत्तर बिहार के सभी जिलों में 16 और 17 मार्च के बीच अधिकांश स्थानों पर हल्की वर्षा होने की संभावना है ।
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि इस अवधि के दौरान कई स्थानों पर आकाशीय बिजली (वज्रपात) चमक सकती है और कुछ जगहों पर तेज हवाएं चलने के साथ-साथ ओलावृष्टि (पत्थर गिरना) भी हो सकती है । हालांकि, 16 और 17 मार्च के अलावा अन्य दिनों में मौसम के मुख्यतः शुष्क रहने का अनुमान है ।
तापमान और हवा की स्थिति: * तापमान: अधिकतम तापमान 31 से 34 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 से 21 डिग्री सेल्सियस के बीच रहने की संभावना है ।
- हवा: पूर्वानुमानित अवधि में मुख्यतः पुरवा हवा चलने का अनुमान है, जिसकी औसत गति 4 से 6 किलोमीटर प्रति घंटा रहेगी । 17-18 मार्च के आसपास हवाओं की गति में तेजी देखी जा सकती है ।
- आर्द्रता: सुबह के समय नमी 80-85 प्रतिशत और दोपहर में 20-25 प्रतिशत तक रह सकती है ।
किसानों के लिए जरूरी दिशा-निर्देश (समसामयिक सुझाव) मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है:
1. फसलों की सुरक्षा और सिंचाई प्रबंधन बारिश और ओलावृष्टि की संभावना को देखते हुए किसानों से अपील की गई है कि वे कटी हुई फसलों को खुले में न छोड़ें और उन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखें । खड़ी फसलों में सिंचाई करने से पहले मौसम की स्थिति का आकलन अवश्य कर लें । इसके अतिरिक्त, इस अनिश्चित मौसम के दौरान फसलों पर किसी भी प्रकार के कीटनाशक का छिड़काव न करें ।
2. गरमा सब्जियों और दलहन की बुआई : वर्षा की संभावना को ध्यान में रखते हुए गरमा सब्जियों की बुआई फिलहाल रोक देनी चाहिए । बारिश होने के तुरंत बाद बुआई करना अधिक लाभदायक होगा ।
- किस्में: लौकी के लिए अर्का बहार, काशी कोमल, पूसा नवीन जैसी उन्नत किस्में सुझाई गई हैं । तरबूज के लिए सुगरबेबी और खरबूज के लिए पूसा शर्बती जैसी किस्मों की अनुशंसा की गई है ।
- मूंग और उरद: गरमा मूंग (किस्में: सम्राट, पूसा विशाल) और उरद की बुआई भी सावधानीपूर्वक या वर्षा के बाद ही करें । बुआई से पहले बीजों का कार्बेन्डाजिम और राइजोबियम कल्चर से उपचार अनिवार्य है ।
3. गन्ने और ओल की खेती वर्षा से मिट्टी में आने वाली नमी का लाभ उठाते हुए बसंतकालीन ईख (गन्ना) की रोपाई में तेजी लाएं । रोपाई के लिए दोमट मिट्टी और ऊंची जमीन का चुनाव करें । इसी प्रकार, ओल (किस्म: गजेंद्र) की रोपाई के लिए भी यह समय उपयुक्त है, लेकिन इसे सावधानीपूर्वक करें ।

4. बागवानी और कीट नियंत्रण (आम के बाग) : वर्तमान में आम के बागों में पूरी तरह मंजर आ चुका है । वैज्ञानिकों ने सख्त हिदायत दी है कि मंजर आने से लेकर फल के मटर के दाने के आकार होने तक किसी भी रासायनिक दवा का छिड़काव न करें । यदि कोई मंजर विकृत (बीमार) दिखे, तो उसे काटकर जला दें ।
- बैंगन: बैंगन की फसल में तना एवं फल छेदक कीट की निगरानी करें । प्रकोप बढ़ने पर प्रभावित हिस्सों को नष्ट कर दें और मौसम साफ होने पर ही उचित दवाओं (जैसे स्पिनोसैड) का छिड़काव करें ।
विश्वविद्यालय के नोडल पदाधिकारी डॉ० ए. सत्तार ने बताया कि आज का अधिकतम तापमान सामान्य से 1.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान सामान्य से 4.6 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया है । किसानों को सलाह दी जाती है कि वे रेडियो, टीवी और समाचार पत्रों के माध्यम से मौसम की पल-पल की जानकारी लेते रहें।




