मुजफ्फरपुर। 31 जनवरी 2026 को स्थानीय एमडीडीएम कॉलेज के प्राध्यापक प्रकोष्ठ में एक विशेष विदाई सभा का आयोजन किया गया। शिक्षक संघ के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम का माहौल तब भावुक हो गया जब दशकों तक महाविद्यालय को अपनी सेवाएं देने वाली दो दिग्गज शिक्षिकाओं ने अपने अनुभव साझा किए।

संघर्ष और स्नेह का संगम: डॉ. किरण झा

समारोह की अध्यक्षता कर रही अंग्रेजी विभागाध्यक्ष एवं शिक्षक संघ की अध्यक्षा डॉ. विनीता झा ने अपने संबोधन में डॉ. किरण झा के व्यक्तित्व के अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि डॉ. किरण झा का जीवन केवल अध्यापन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनका जीवन संघर्षों से जूझने और उनसे विजय प्राप्त करने की एक जीवंत गाथा है। उनकी अध्यापकीय कला और दूसरों के प्रति उनके परोपकारी स्वभाव से युवा शिक्षकों को बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। डॉ. झा ने अपने पूरे सेवाकाल में केवल ज्ञान ही नहीं, बल्कि सबको स्नेह और ममता बांटी है।

इसी क्रम में राजनीति शास्त्र की विभागाध्यक्ष और शिक्षक संघ की सचिव डॉ. कुमारी सरोज ने डॉ. किरण झा को एक ‘आदर्श शिक्षिका’ की संज्ञा दी। उन्होंने कहा कि छात्राओं के बीच उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण उनका मृदुल व्यवहार और हर किसी को अपना आशीर्वाद प्रदान करने की उनकी सहज प्रवृत्ति है।

सरलता और साहस की प्रतिमूर्ति: डॉ. मनीष प्रभा

गणित जैसे कठिन विषय को छात्राओं के लिए सुगम बनाने वाली डॉ. मनीष प्रभा के योगदान को भी इस अवसर पर सराहा गया। डॉ. विनीता झा ने कहा कि डॉ. मनीष प्रभा की हिम्मत और उनके भीतर का अपनापन किसी को भी सहज ही मुग्ध कर देता है। डॉ. कुमारी सरोज ने उन्हें एक ‘संघर्षशील शिक्षिका’ बताया, जिनकी सरलता ही उनकी सबसे बड़ी पहचान बनी। गणित विभाग की उनकी सहयोगी डॉ. माला अपने वरिष्ठ के अवकाश ग्रहण करने पर भावुक हो उठीं। उन्होंने डॉ. मनीष प्रभा को अपना अभिभावक बताते हुए उनके सुखद और मंगलमय भविष्य की कामना की।

प्राचार्या और सहयोगियों के अनुभव

महाविद्यालय की प्राचार्या डॉ. अलका जायसवाल ने दोनों शिक्षिकाओं के साथ बिताए गए लंबे समय को याद किया। उन्होंने कहा, “प्रशासनिक और शैक्षणिक कार्यों के दौरान मुझे इन दोनों का जो सहयोग और अपनापन मिला, उससे मैं अभिभूत हूँ। डॉ. किरण और डॉ. मनीष प्रभा ने न केवल अपने विभागों को बल्कि पूरे महाविद्यालय परिवार को एक सूत्र में पिरोकर रखा।”

शिक्षक संघ की कोषाध्यक्ष और महाविद्यालय की परीक्षा नियंत्रक डॉ. निशिकांति ने भी अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने कहा कि इन दोनों वरिष्ठ सहयोगियों ने समय-समय पर न केवल मार्गदर्शन दिया, बल्कि एक अभिभावक की तरह प्रेम भी किया। उनके सहयोग को शब्दों में बयां करना कठिन है और जीवन के किसी भी मोड़ पर उन्हें भुलाया नहीं जा सकता।

शिष्याओं को भेंट की ‘ज्ञान की पूंजी’

कार्यक्रम का सबसे हृदयस्पर्शी क्षण वह था जब दर्शनशास्त्र की सहायक प्राध्यापक डॉ. सुरबाला और डॉ. नेहा रानी ने डॉ. किरण झा के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की। उन्होंने डॉ. झा को अपना गुरु और अभिभावक माना। इस मौके पर डॉ. किरण झा ने एक प्रेरक मिसाल पेश करते हुए अपनी निजी संग्रह की महत्वपूर्ण पुस्तकें डॉ. सुरबाला और डॉ. नेहा रानी को भेंट स्वरूप प्रदान कीं। उन्होंने संदेश दिया कि पुस्तकें अलमारी में रखने के लिए नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के मस्तिष्क को प्रकाशित करने के लिए होती हैं।

अंतिम संदेश: “ईमानदारी ही अध्यापन का आधार”

अपने विदाई भाषण में डॉ. किरण झा ने कहा, “अध्यापन कोई पेशा नहीं, बल्कि सबसे बड़ा धर्म है। यदि आप अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाते हैं, तो समाज और छात्र आपको कभी नहीं भूलते।” उन्होंने अपने सेवाकाल के कई अविस्मरणीय पलों को साझा किया, जिसे सुनकर उपस्थित लोगों की आँखें नम हो गईं।

सम्मान और विदाई

कार्यक्रम के अंत में शिक्षक संघ द्वारा दोनों विदा होने वाली शिक्षिकाओं को शॉल, स्मृति चिह्न और बुके देकर सम्मानित किया गया। समारोह में महाविद्यालय के विभिन्न विभागों के प्राध्यापक, प्राध्यापिकाएं एवं बड़ी संख्या में शिक्षकेतर कर्मचारी उपस्थित रहे। सभी ने एक स्वर में दोनों के स्वस्थ और सुदीर्घ जीवन की कामना की।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here